प्रमुख वैदिक स्तोत्र एवं अष्टकम् संग्रह
ऋषियों और आचार्यों द्वारा रचित जाग्रत स्तोत्र, जो जीवन में विजय, धन-धान्य, शांति और भगवद्कृपा प्रदान करते हैं।
श्री शिव ताण्डव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram)
लंकानरेश रावण द्वारा रचित शिव ताण्डव स्तोत्रम् भगवान शिव के नटराज स्वरूप का अप्रतिम संस्कृत काव्य है। इसके पाठ से वाणी में ओज, आत्मविश्वास और शिव सायुज्य की प्राप्ति होती है।
मधुराष्टकम् (Madhurashtakam)
श्रीमद् वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित मधुराष्टकम् भगवान श्री कृष्ण के सौन्दर्य और माधुर्य का साक्षात् अमृत है। इसमें प्रभु के प्रत्येक रूप, वचन, गति और लीला को मधुर कहा गया है।
कनकधारा स्तोत्रम् (Kanakadhara Stotram)
जगतगुरु आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र माँ महालक्ष्मी की अमोघ कृपा प्राप्त करने वाला दिव्य स्तोत्र है। इसके सस्वर पाठ से दरिद्रता का नाश और अखंड ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम् (Mahishasura Mardini Stotram)
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र माँ जगदम्बा दुर्गा के शक्ति स्वरूप का साक्षात् नाद-ब्रह्म है। इसके ओजस्वी सस्वर पाठ से नकारात्मक शक्तियों का नाश, निर्भयता और अमोघ शक्ति की प्राप्ति होती है।
आदित्य हृदय स्तोत्रम् (Aditya Hridaya Stotram)
युद्धभूमि में महर्षि अगस्त्य द्वारा भगवान श्री राम को उपदेशित आदित्य हृदय स्तोत्र भगवान सूर्य का परम पावन स्तोत्र है। इसके पाठ से जीवन में सर्वत्र विजय, आरोग्य और तेज की प्राप्ति होती है।
श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम् (Vishnu Sahasranamam)
भीष्म पितामह द्वारा शरशैया पर धर्मराज युधिष्ठिर को दिया गया श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र सनातन धर्म का परम जाग्रत महामंत्र है। इसके पाठ से ग्रह-बाधा, रोग और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
संकटमोचन हनुमानाष्टकम् (Sankat Mochan Hanuman Ashtak)
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमानाष्टक का प्रत्येक छंद जीवन के घोर से घोर संकटों को हरने वाला दिव्य रक्षा कवच है।
कालभैरवाष्टकम् (Kalabhairav Ashtakam)
आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित कालभैरवाष्टकम् काशी के अधिपति कालभैरव की परम स्तुति है। इसके पाठ से काल-भय, अकाल मृत्यु, शत्रुभय और ग्रहदोषों का समूल नाश होता है।







