श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम् (Vishnu Sahasranamam)

श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम् (Vishnu Sahasranamam)

श्री हरि विष्णु

भीष्म पितामह द्वारा शरशैया पर धर्मराज युधिष्ठिर को दिया गया श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र सनातन धर्म का परम जाग्रत महामंत्र है। इसके पाठ से ग्रह-बाधा, रोग और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

🕉️ ॥ श्लोक 1 ॥
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥
हिंदी भावार्थ: श्वेत वस्त्र धारण करने वाले, चंद्रमा के समान शीतल कांति वाले, चार भुजाओं वाले और परम प्रसन्न मुखारविंद वाले भगवान श्री विष्णु का हम समस्त विघ्नों की शांति के लिए ध्यान करते हैं।
🕉️ ॥ श्लोक 2 ॥
यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात्। विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे॥ ओं नमो भगवते वासुदेवाय॥
हिंदी भावार्थ: जिनके केवल स्मरण मात्र से मनुष्य इस जन्म-मरण रूपी संसार-बंधन से मुक्त हो जाता है, उन सर्वशक्तिमान प्रभु श्री विष्णु को कोटि-कोटि नमस्कार है। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
🕉️ ॥ श्लोक 3 ॥
विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः। भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः॥
हिंदी भावार्थ: वे ही विश्वरूप हैं, सर्वव्यापी विष्णु हैं, यज्ञ के वषट्कार हैं, भूत-भविष्य-वर्तमान के स्वामी हैं, समस्त प्राणियों के सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और अंतरात्मा हैं।
🕉️ ॥ श्लोक 4 ॥
पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः। अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च॥
हिंदी भावार्थ: वे परम पवित्र आत्मा हैं, परमात्मा हैं, मुक्त पुरुषों की परम गति हैं, अविनाशी पुरुष हैं, जगत के साक्षी हैं, क्षेत्रज्ञ (हृदय को जानने वाले) और अक्षर ब्रह्म हैं।

❓ श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम् (Vishnu Sahasranamam) से संबंधित मुख्य प्रश्नोत्तर (FAQs)

1. विष्णु सहस्रनाम का पाठ किस दिन करना चाहिए?

गुरुवार, एकादशी तिथि और पूर्णिमा के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष रूप से पुण्यदायी और मोक्षप्रद माना गया है।

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