कनकधारा स्तोत्रम् (Kanakadhara Stotram)
जगतगुरु आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र माँ महालक्ष्मी की अमोघ कृपा प्राप्त करने वाला दिव्य स्तोत्र है। इसके सस्वर पाठ से दरिद्रता का नाश और अखंड ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
❓ कनकधारा स्तोत्रम् (Kanakadhara Stotram) से संबंधित मुख्य प्रश्नोत्तर (FAQs)
1. कनकधारा स्तोत्र की रचना कब और किसने की थी?
आदि शंकराचार्य जी ने एक निर्धन ब्राह्मणी की दारुण दरिद्रता को दूर करने के लिए माँ लक्ष्मी की यह स्तुति की थी, जिससे प्रसन्न होकर माँ लक्ष्मी ने स्वर्ण आंवलों की वर्षा (कनकधारा) की थी।
2. कनकधारा स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
शुक्रवार, धनतेरस, दीपावली और पूर्णिमा की संध्याकाल में घी का दीपक जलाकर इसका पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
🌸 अन्य पावन स्तोत्र व स्तुतियाँ
श्री शिव ताण्डव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram)
लंकानरेश रावण द्वारा रचित शिव ताण्डव स्तोत्रम् भगवान शिव के नटराज स्वरूप का अप्रतिम संस्कृत काव्य है। इसके पाठ से वाणी में ओज, आत्मविश्वास और शिव सायुज्य की प्राप्ति होती है।
मधुराष्टकम् (Madhurashtakam)
श्रीमद् वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित मधुराष्टकम् भगवान श्री कृष्ण के सौन्दर्य और माधुर्य का साक्षात् अमृत है। इसमें प्रभु के प्रत्येक रूप, वचन, गति और लीला को मधुर कहा गया है।
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम् (Mahishasura Mardini Stotram)
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र माँ जगदम्बा दुर्गा के शक्ति स्वरूप का साक्षात् नाद-ब्रह्म है। इसके ओजस्वी सस्वर पाठ से नकारात्मक शक्तियों का नाश, निर्भयता और अमोघ शक्ति की प्राप्ति होती है।


