आदित्य हृदय स्तोत्रम् (Aditya Hridaya Stotram)

आदित्य हृदय स्तोत्रम् (Aditya Hridaya Stotram)

भगवान श्री सूर्य नारायण

युद्धभूमि में महर्षि अगस्त्य द्वारा भगवान श्री राम को उपदेशित आदित्य हृदय स्तोत्र भगवान सूर्य का परम पावन स्तोत्र है। इसके पाठ से जीवन में सर्वत्र विजय, आरोग्य और तेज की प्राप्ति होती है।

🕉️ ॥ श्लोक 1 ॥
ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्। रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्। उपागम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवानृषिः॥
हिंदी भावार्थ: युद्धभूमि में रावण को सामने उपस्थित देखकर रण-परिश्रांत भगवान श्री राम को चिंताग्रस्त देख, देवताओं के साथ युद्ध देखने आए परम तेजस्वी महर्षि अगस्त्य जी ने श्री राम के समीप जाकर यह पावन उपदेश दिया।
🕉️ ॥ श्लोक 2 ॥
राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम्। येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसि॥ आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्। जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्॥
हिंदी भावार्थ: हे महाबाहो श्री राम! इस परम गोपनीय और सनातन आदित्य हृदय स्तोत्र को सुनो, जिसके प्रभाव से तुम समर में समस्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त करोगे। यह स्तोत्र परम पवित्र, समस्त शत्रुओं का नाश करने वाला, नित्य विजय दिलाने वाला और अक्षय कल्याणकारी है।
🕉️ ॥ श्लोक 3 ॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम्। चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्॥ रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्। पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्॥
हिंदी भावार्थ: यह स्तोत्र समस्त मंगलों का भी परम मंगल है, समस्त पापों का नाशक है, चिंता और शोक को शांत करने वाला और आयु की वृद्धि करने वाला है। उदित होते हुए, देवासुरों द्वारा नमस्कृत, संपूर्ण जगत के स्वामी भुवनभास्कर भगवान सूर्य का पूजन करो।
🕉️ ॥ श्लोक 4 ॥
नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः। ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः॥ जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः। नमो नमः सहस्रांशो आदित्याय नमो नमः॥
हिंदी भावार्थ: पूर्वांचल और उत्तरांचल पर्वत को नमन! समस्त नक्षत्रों और ग्रहों के स्वामी तथा दिन के अधिपति सूर्य देव को नमन! विजय और कल्याण स्वरूप, सात श्वेत अश्वों वाले सहस्रांशु भगवान आदित्य को बारम्बार नमस्कार!

❓ आदित्य हृदय स्तोत्रम् (Aditya Hridaya Stotram) से संबंधित मुख्य प्रश्नोत्तर (FAQs)

1. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके इसका पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

🌸 अन्य पावन स्तोत्र व स्तुतियाँ

श्री शिव ताण्डव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram) स्तोत्र

श्री शिव ताण्डव स्तोत्रम् (Shiv Tandav Stotram)

देवाधिदेव महादेव शिव

लंकानरेश रावण द्वारा रचित शिव ताण्डव स्तोत्रम् भगवान शिव के नटराज स्वरूप का अप्रतिम संस्कृत काव्य है। इसके पाठ से वाणी में ओज, आत्मविश्वास और शिव सायुज्य की प्राप्ति होती है।

मधुराष्टकम् (Madhurashtakam) स्तोत्र

मधुराष्टकम् (Madhurashtakam)

भगवान श्री कृष्ण

श्रीमद् वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित मधुराष्टकम् भगवान श्री कृष्ण के सौन्दर्य और माधुर्य का साक्षात् अमृत है। इसमें प्रभु के प्रत्येक रूप, वचन, गति और लीला को मधुर कहा गया है।

कनकधारा स्तोत्रम् (Kanakadhara Stotram) स्तोत्र

कनकधारा स्तोत्रम् (Kanakadhara Stotram)

माँ महालक्ष्मी

जगतगुरु आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित कनकधारा स्तोत्र माँ महालक्ष्मी की अमोघ कृपा प्राप्त करने वाला दिव्य स्तोत्र है। इसके सस्वर पाठ से दरिद्रता का नाश और अखंड ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।