दैनिक वैदिक पंचांग एवं शुभ मुहूर्त

सटीक तिथि, वार, नक्षत्र, अभिजीत मुहूर्त, राहु काल, दिन-रात का चौघड़िया एवं 2026-2027 हिंदू व्रत-त्योहार कैलेंडर।

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🕉️ प्रयागराज
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तिथि एवं संवत

तिथि--
पक्ष--
तिथि प्रारंभ--
तिथि समाप्ति--
मास (Masa)--
विक्रम संवत्--
शक संवत्--
☀️

वार एवं सूर्योदय-सूर्यास्त

वार (दिन)--
दिन के स्वामी--
सूर्योदय (Sunrise)--
सूर्यास्त (Sunset)--
दिन की अवधि--
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नक्षत्र, योग एवं करण

नक्षत्र--
नक्षत्र समाप्ति--
योग--
योग समाप्ति--
करण--
करण समाप्ति--
चंद्र राशि--
सूर्य राशि--
चंद्रोदय (Moonrise)--
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शुभ मुहूर्त (Auspicious)

अभिजीत मुहूर्त--
ब्रह्म मुहूर्त--
गोधूलि मुहूर्त--
⚠️

अशुभ काल (वर्जित समय)

राहु काल--
यमगण्ड--
गुलिक काल--
दिशा शूल--
🪔

वर्तमान सक्रिय चौघड़िया

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● अभी सक्रिय मुहूर्त

शुभ कार्य प्रारंभ करने हेतु अमृत, शुभ व लाभ चौघड़िया सर्वोत्तम फलदायी माने जाते हैं।

आज का सम्पूर्ण चौघड़िया (Day & Night Choghadiya)

प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.5 घंटे (90 मिनट) की शुभ-अशुभ समयावधि होता है।

समय (Time Slot) चौघड़िया शुभ / अशुभ प्रकार प्रभाव एवं निर्देश स्थिति

प्रमुख हिंदू व्रत एवं त्योहार (Festival Calendar 2026)

आगामी पावन पर्व, व्रत कथा एवं पूजन विधि की सीधी कड़ी।

📜 वैदिक पंचांग का शास्त्रीय विज्ञान: पंच-अंग, चौघड़िया एवं शुभ मुहूर्त

सनातन काल-गणना में 'पंचांग' का शाब्दिक अर्थ है—काल के पाँच प्रमुख अंग। महर्षि वशिष्ठ और वराहमिहिर के अनुसार जो मनुष्य नित्य प्रातः पंचांग के पाँचों अंगों का श्रवण या स्मरण करता है, उसे गंगा स्नान के समान पुण्य फल, आयु वृद्धि, पापनाश और संपूर्ण कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है।

🕉️ पंचांग के पाँच मूलभूत अंग एवं आध्यात्मिक फल

१. तिथि (Tithi) - 'तिथेश्च श्रियमाप्नोति'

सूर्य और चन्द्रमा के देशांतर के बीच १२ अंश की कोणीय दूरी एक तिथि कहलाती है। शुक्ल पक्ष व कृष्ण पक्ष मिलाकर कुल ३० तिथियां होती हैं। तिथि स्मरण से धन एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

२. वार (Vara) - 'वारादायुष्यवर्धनम्'

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का काल एक सौर दिवस (वार) कहलाता है। सातों वारों के स्वामी ग्रह (रवि, सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) मनुष्य के स्वास्थ्य और दीर्घायु की वृद्धि करते हैं।

३. नक्षत्र (Nakshatra) - 'नक्षत्राद्धरते पापम्'

आकाशगंगा में चन्द्रमा के परिभ्रमण पथ के २७ समान भाग नक्षत्र कहलाते हैं। अश्विनी से रेवती तक २७ नक्षत्रों का ध्यान समस्त पूर्व संचित पापों का क्षय करता है।

४. योग (Yoga) - 'योगाद्रोगनिवारणम्'

सूर्य व चन्द्र के भोगांशों का योग कर १३ अंश २० कला के २७ योग बनते हैं (विष्कम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य आदि)। शुभ योग के स्मरण से शारीरिक व मानसिक रोगों का निवारण होता है।

५. करण (Karana) - 'करणात् कार्यसिद्धिः स्यात्'

एक तिथि के अर्ध-भाग (६ अंश) को करण कहा जाता है। कुल ११ करणों में ७ चर (बव, बालव, कौलव आदि) और ४ स्थिर (शकुनि, चतुष्पद आदि) होते हैं। करण का ज्ञान संकल्पित कार्यों में सिद्धि दिलाता है।

✨ अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurat)

दिन के मध्याह्न काल का आठवाँ मुहूर्त भगवान विष्णु का परम प्रिय अभिजीत मुहूर्त कहलाता है। यह समस्त दोषों को भस्म कर किसी भी नए कार्य के शुभारंभ हेतु अत्यंत श्रेष्ठ है।

⏰ चौघड़िया का अर्थ एवं सातों मुहूर्त का फल

चौघड़िया दिन और रात के समय को लगभग १.५ घंटे के ८-८ भागों में बाँटकर बनता है। इनमें सात प्रकार के चौघड़िया होते हैं:

अमृत चौघड़िया: अति श्रेष्ठ, दीर्घायु, शांति व मांगलिक कार्यों हेतु।
शुभ चौघड़िया: धर्म-कर्म, विवाह, पूजा व उत्सव हेतु उत्तम।
लाभ चौघड़िया: व्यापार, धनोपार्जन व नया खाता खोलने हेतु लाभकारी।
चर चौघड़िया: यात्रा, वाहन क्रय एवं गतिमान कार्यों हेतु।
उद्वेग, काल व रोग: हानिकारक एवं अशुभ, इनमें शुभ कार्य वर्जित हैं।
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