सम्पूर्ण आरती संग्रह (Aarti Sangrah)
सनातन परंपरा में आरती ईश्वर के प्रति सर्वोच्च भक्ति, समर्पण और कृतज्ञता प्रकट करने का पावन माध्यम है। यहाँ सभी प्रमुख देवी-देवताओं की प्रामाणिक आरतियां उपलब्ध हैं।
जय गणेश देवा (श्री गणेश आरती)
भगवान श्री गणेश जी की यह पावन आरती जय गणेश देवा प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता के प्रति सम्पूर्ण समर्पण और स्तुति का पावन माध्यम है। किसी भी शुभ कार्य एवं नित्य पूजन में इसका गायन मंगलकारी होता है।
ॐ जय जगदीश हरे (विष्णु आरती)
सनातन धर्म की सर्वप्रमुख एवं सर्वाधिक गाई जाने वाली पावन आरती ॐ जय जगदीश हरे सम्पूर्ण समर्पण और निष्काम भक्ति का दिव्य स्त्रोत है।
ॐ जय शिव ओंकारा (शिव आरती)
देवाधिदेव महादेव शिव जी की यह प्रसिद्ध आरती ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के एकाकार स्वरूप की वंदना करती है। इसके नित्य पाठ से मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जय अम्बे गौरी (माँ दुर्गा आरती)
आदिशक्ति माँ दुर्गा की यह विश्वप्रसिद्ध आरती नवरात्रि एवं नित्य संध्या काल में माँ के शक्ति स्वरूप की आराधना का सर्वोत्तम माध्यम है।
आरती कीजै हनुमान लला की
पवनसुत हनुमान जी की यह आरती उनकी असीम शक्ति, श्रीराम भक्ति और भक्तों के सभी संकटों को दूर करने की महिमा का गुणगान करती है।
ॐ जय लक्ष्मी माता (महालक्ष्मी आरती)
धन, वैभव, सौभाग्य और आरोग्यता की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी की पावन आरती। शुक्रवार तथा दीपावली पूजन में यह आरती विशेष रूप से गायी जाती है।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन (राम स्तुति व आरती)
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित यह पावन राम स्तुति भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के दिव्य सौंदर्य, शील और कृपा का अनुपम गुणगान करती है।
आरती कुंजबिहारी की (श्री कृष्ण आरती)
वृंदावन बिहारी भगवान श्री कृष्ण की यह मनमोहक आरती भक्तों के हृदय में प्रेम रस और दिव्य शांति का संचार करती है।
जय सरस्वती माता (माँ सरस्वती आरती)
विद्या और विवेक की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पावन आरती विद्यार्थियों, साधकों और संगीतकारों के लिए असीम ज्ञान और एकाग्रता प्रदान करने वाली है।








