अहोई अष्टमी व्रत कथा
🎯 व्रत का उद्देश्य एवं फल
संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, रक्षा एवं संतानहीनता निवारण
📖 सम्पूर्ण प्रामाणिक व्रत कथा
दुर्भाग्यवश साहूकार की पत्नी की खुरपी सेह के एक बच्चे को लग गई, जिससे उस बच्चे की वहीं तड़प-तड़पकर मृत्यु हो गई। साहूकार की पत्नी को इसका अत्यंत पश्चाताप हुआ, किन्तु वह विवश थी और भारी मन से घर लौट आई।
इसके कुछ ही समय बाद, उस पाप के फलस्वरुप एक ही वर्ष के भीतर साहूकार के सातों पुत्रों की बारी-बारी से मृत्यु हो गई। साहूकार और उसकी पत्नी पुत्र-शोक में विलाप करने लगे और वन में जाकर देह त्यागने का निश्चय किया। तब वन में एक आकाशवाणी हुई—"हे ब्राह्मणी! शोक मत करो। कार्तिक कृष्ण अष्टमी के दिन अहोई माता का निर्जला व्रत रखो और गाय के बछड़े सहित सेह की चित्र बनाकर क्षमा याचना करो। इससे तुम्हारे सातों पुत्र पुनः जीवित हो उठेंगे।" साहूकार की पत्नी ने पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से अहोई अष्टमी का निर्जला व्रत किया और तारों को देखकर अर्घ्य दिया। अहोई माता ने प्रसन्न होकर उसके सातों पुत्रों को जीवनदान दिया।
🪔 व्रत पूजा विधि एवं नियम
- • प्रातः स्नानादि कर संतान की दीर्घायु का संकल्प लेकर निर्जला उपवास रखें।
- • दीवार पर गेरू से अहोई माता, स्याहु (सेह) और उसके सात बच्चों का सुंदर चित्र बनाएं।
- • पूजा में एक मिट्टी के करवे में जल भरकर रखें और सिंघाड़े, फल और आठ पूड़ी व हलवे का भोग लगाएं।
- • चांदी का एक अहोई अष्टक (हार) बनाकर उसकी पूजा करें और गले में धारण करें।
- • संध्या समय आकाश में तारे निकलने पर तारों को अर्घ्य देकर माता का आशीर्वाद लें और व्रत खोलें।
✨ व्रत उद्यापन विधि
व्रत के बाद घर की बुजुर्ग सास अथवा ननद को बायना (साड़ी, सुहाग सामग्री, फल और मिष्ठान) भेंट कर चरण स्पर्श करें।
अन्य पावन व्रत कथाएं
श्री सत्यनारायण व्रत कथा
स्कन्द पुराण के रेवाखंड से उद्धृत भगवान श्री सत्यनारायण की पावन कथा। इसमें नारद जी की लोककल्याणकारी प्रार्थना पर भगवान विष्णु द्वारा सत्यनारायण व्रत का विधान बताया गया है। शतानंद ब्राह्मण, लकड़हारा, राजा उल्कामुख और साधु वैश्य की कथाएं सत्य और प्रभु भक्ति की महिमा को उजागर करती हैं।
करवा चौथ व्रत कथा
सुहागिन स्त्रियों का सर्वाधिक पावन एवं प्रतिष्ठित निर्जला महाव्रत। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।
सम्पूर्ण एकादशी व्रत कथा व महात्म्य
पद्म पुराण में वर्णित एकादशी देवी की उत्पत्ति और एकादशी व्रत का सर्वोच्च महात्म्य। वर्ष की सभी 24 एकादशियों (निर्जला, देवशयनी, देवउठनी, उत्पन्ना आदि) में भगवान विष्णु की पूजा और अन्न त्याग का विधान है।


