सम्पूर्ण एकादशी व्रत कथा व महात्म्य
पावन व्रत कथा

सम्पूर्ण एकादशी व्रत कथा व महात्म्य

भगवान श्री हरि विष्णु
📅 व्रत समय: प्रत्येक मास की शुक्ल व कृष्ण एकादशी (वर्ष में २४ एकादशियां)

🎯 व्रत का उद्देश्य एवं फल

समस्त पापों का क्षय, मानसिक शांति, वैकुंठ प्राप्ति एवं मोक्ष

📖 सम्पूर्ण प्रामाणिक व्रत कथा

एकादशी देवी की उत्पत्ति: सत्ययुग में मुर नामक एक अत्यंत बलशाली और क्रूर दैत्य हुआ। उसने देवताओं, इंद्र, वरुण और यम को परास्त कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। त्राहि-त्राहि करते हुए सभी देवता भगवान शिव के पास गए। शिव जी ने उन्हें भगवान विष्णु की शरण में जाने को कहा।

भगवान विष्णु मुर दैत्य की विशाल सेना से सैकड़ों वर्षों तक युद्ध करते रहे। जब युद्ध करते-करते प्रभु थक गए, तो वे बद्रिकाश्रम की 'हेमावती' नामक एक सुंदर गुफा में विश्राम करने चले गए और योगनिद्रा में लीन हो गए। मुर दैत्य प्रभु का वध करने के उद्देश्य से उस गुफा में तलवार लेकर प्रविष्ट हुआ। उसी क्षण भगवान विष्णु के शरीर से एक परम तेजस्वी, अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित दिव्य कन्या प्रकट हुई। उस दिव्य कन्या ने हुंकार भरी और मुर दैत्य से भीषण युद्ध कर कुछ ही क्षणों में उसका वध कर दिया।

जब भगवान विष्णु निद्रा से जागे, तो उन्होंने मुर दैत्य को मृत पाया। भगवान ने उस कन्या से पूछा—"हे कल्याणी! तुम कौन हो?" कन्या ने कहा—"प्रभु! मैं आपकी ही देह शक्ति से उत्पन्न हुई हूँ और मैंने इस पापी दैत्य का वध किया है।" भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए और बोले—"चूँकि तुम्हारा प्राकट्य मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को हुआ है, अतः तुम्हारा नाम 'एकादशी' होगा। जो मनुष्य एकादशी के दिन अन्न का त्याग कर तुम्हारा व्रत रखेगा, उसके जन्म-जन्मांतर के समस्त पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे मेरा परम धाम (वैकुंठ) प्राप्त होगा।"

🪔 व्रत पूजा विधि एवं नियम

✨ व्रत उद्यापन विधि

वर्षभर की 24 एकादशियों का व्रत करने के उपरांत उद्यापन में भगवान विष्णु और एकादशी देवी का हवन, ब्राह्मण भोजन और श्रीमद्भागवत का पाठ कराया जाता है।

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