करवा चौथ व्रत कथा
पावन व्रत कथा

करवा चौथ व्रत कथा

करवा माता, भगवान शिव, माँ पार्वती एवं श्री गणेश
📅 व्रत समय: कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी

🎯 व्रत का उद्देश्य एवं फल

अखंड सौभाग्य, दांपत्य प्रेम और पति की दीर्घायु

📖 सम्पूर्ण प्रामाणिक व्रत कथा

वीरवती की पावन कथा: प्राचीन काल में एक नगर में एक धर्मात्मा साहूकार रहता था। उसके सात पुत्र और एक गुणवती पुत्री थी जिसका नाम वीरवती था। सात भाइयों की इकलौती बहन होने के कारण वह सबकी अति लाडली थी। विवाह के उपरांत वीरवती करवा चौथ का व्रत रखने अपने मायके आई।

उसने पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। संध्या समय भूख-प्यास से वह अत्यंत दुर्बल हो गई और मूर्छित होने लगी। उसके भाइयों से बहन की यह व्याकुलता देखी नहीं गई। वे वन में गए और एक ऊंचे वटवृक्ष पर दीपक जलाकर छलनी की ओट में रख दिया। फिर उन्होंने आकर वीरवती से कहा—"बहन! देखो आकाश में चंद्रमा निकल आया है, उठो और अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो।"

वीरवती ने भाइयों की बात पर विश्वास कर नकली चंद्रमा को अर्घ्य देकर जैसे ही भोजन का पहला निवाला मुंह में डाला, उसमें बाल निकल आया। दूसरे ग्रास पर छींक आई और तीसरा ग्रास डालते ही समाचार मिला कि उसके पति का देहांत हो गया है। वीरवती विलाप करने लगी। तब माँ इंद्राणी (पार्वती जी) ने प्रकट होकर बताया कि छल से व्रत भंग होने के कारण ऐसा हुआ है। देवी ने उसे वर्ष भर के प्रत्येक माह की चतुर्थी का व्रत करने और अगले करवा चौथ पर पूर्ण श्रद्धा से निर्जला व्रत रखने का आदेश दिया। वीरवती ने नियमपूर्वक प्रायश्चित व व्रत किया, जिससे भगवान शिव-पार्वती की कृपा से उसका पति पुनः जीवित हो उठा।

करवा नामक पतिव्रता स्त्री की कथा: करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करते समय एक मगरमच्छ के जबड़े में फंस गया। करवा ने अपने सतीत्व के बल से सूत के कच्चे धागे से मगरमच्छ को बांध दिया और यमराज के पास पहुंच गई। उसने यमराज से कहा—"मेरे पति को दीर्घायु दें और उस दुष्ट मगर को दंड दें।" यमराज ने करवा के पतिव्रत धर्म से प्रसन्न होकर उसके पति को जीवनदान दिया और मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया। तभी से करवा चौथ का यह पावन व्रत सर्वत्र प्रसिद्ध हुआ।

🪔 व्रत पूजा विधि एवं नियम

✨ व्रत उद्यापन विधि

व्रत के उपरांत अपनी सास अथवा घर की वरिष्ठ सुहागिन महिला को करवा, बायना (मिठाई, फल, वस्त्र व श्रृंगार सामग्री) भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त करें।

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