श्रीमद्भगवद्गीता
कुल श्लोक: 28
अध्याय ८: अक्षरब्रह्मयोग
Akshara Brahma Yoga
मूल विषय: अंतकाल में प्रभु स्मरण, ॐ की महत्ता एवं जन्म-मरण चक्र से मुक्ति
अध्याय परिचय एवं पृष्ठभूमि
आठवें अध्याय में अर्जुन के ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ संबंधी प्रश्नों का उत्तर दिया गया है। अंत समय में जीवात्मा की क्या गति होती है और ॐ एकाक्षर ब्रह्म के निरंतर स्मरण से परम धाम कैसे प्राप्त होता है, इसका सुंदर विवेचन है।
अध्याय के प्रमुख एवं प्रामाणिक श्लोक
श्लोक संग्रह #1
संस्कृत मूल
अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम्।
यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः॥ (८.५)
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य अंतकाल में भी मेरा ही स्मरण करते हुए शरीर का त्याग करता है, वह मेरे साक्षात स्वरूप को प्राप्त होता है, इसमें कोई संशय नहीं है।
श्लोक संग्रह #2
संस्कृत मूल
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्॥ (८.१३)
हिंदी भावार्थ: जो पुरुष 'ॐ' रूपी एकाक्षर ब्रह्म का उच्चारण करता हुआ और मेरा स्मरण करता हुआ देह त्याग करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।
दैनिक जीवन में इस अध्याय की सीख
- • जीवन पर्यंत जो विचार मन में प्रधान रहता है, अंत समय में वही चेतना उभरती है।
- • नित्य प्रभु स्मरण ही अंतकाल में शांत और पवित्र चेतना बनाए रखने का एकमात्र उपाय है।
- • ब्रह्मलोक तक के सभी लोक पुनरावर्ती हैं, किन्तु परमात्मा को पाने के बाद पुनर्जन्म नहीं होता।
अन्य पावन स्तुति एवं पाठ
श्री हनुमान चालीसा
संकटमोचन श्री हनुमान
बल, बुद्धि और विद्या के दाता श्री हनुमान जी की पावन चालीसा का नित्य पाठ।
श्री राम चंद्र कृपालु भजु मन
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित अनुपम श्रीराम स्तुति।


