हरतालिका तीज व्रत कथा
🎯 व्रत का उद्देश्य एवं फल
मनवांछित सुयोग्य वर की प्राप्ति, अखंड सौभाग्य एवं दांपत्य सुख
📖 सम्पूर्ण प्रामाणिक व्रत कथा
पार्वती जी की एक परम विश्वासपात्र सखी ने उनका दुःख समझा और उन्हें पिता के महल से दूर एक घने, निर्जन वन में ले गई। इस प्रकार सखी द्वारा 'हरत' (अपहरण) किए जाने के कारण इस व्रत का नाम 'हरतालिका' पड़ा।
उस निर्जन वन में माँ पार्वती ने एक गुफा में रेत और मिट्टी से भगवान शिव का शिवलिंग बनाया और निराहार, निर्जला रहकर कठोर तपस्या प्रारंभ की। वे केवल सूखे पत्ते खाकर या केवल वायु पीकर तप करती रहीं। भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन उन्होंने हस्त नक्षत्र में रातभर जागरण कर भगवान शिव की आराधना की। पार्वती जी के इस अनन्य और अडिग तप से आशुतोष भगवान शिव का आसन डोल उठा। भगवान शिव ने साक्षात प्रकट होकर पार्वती जी से वर मांगने को कहा। पार्वती जी ने हाथ जोड़कर कहा—"हे प्रभु! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो मुझे अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करें।" भगवान शिव ने 'तथास्तु' कहा और अंतर्धान हो गए। इसके पश्चात राजा हिमाचल भी वन में पहुंचे और पुत्री के संकल्प को देखकर उनका विवाह विधिपूर्वक भगवान शिव से कराया।
🪔 व्रत पूजा विधि एवं नियम
- • प्रातः स्नानादि करके निर्जला व्रत का संकल्प लें और सोलह श्रृंगार करें।
- • काली मिट्टी अथवा गंगा की रेत से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की सुंदर प्रतिमा बनाएं।
- • फूलों से सजा मंडप बनाकर प्रतिमा स्थापित करें। बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, भांग और फल अर्पित करें।
- • रात्रि में चारों प्रहर की पूजा और जागरण करें तथा हरतालिका तीज की कथा का श्रवण करें।
- • अगले दिन प्रातः पुनः पूजन कर मिट्टी की प्रतिमाओं को पवित्र नदी या सरोवर में विसर्जित करें।
✨ व्रत उद्यापन विधि
व्रत के अगले दिन सुहागिन ब्राह्मण स्त्रियों को सुहाग पिटारी (सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, साड़ी, दर्पण आदि) और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें।
अन्य पावन व्रत कथाएं
श्री सत्यनारायण व्रत कथा
स्कन्द पुराण के रेवाखंड से उद्धृत भगवान श्री सत्यनारायण की पावन कथा। इसमें नारद जी की लोककल्याणकारी प्रार्थना पर भगवान विष्णु द्वारा सत्यनारायण व्रत का विधान बताया गया है। शतानंद ब्राह्मण, लकड़हारा, राजा उल्कामुख और साधु वैश्य की कथाएं सत्य और प्रभु भक्ति की महिमा को उजागर करती हैं।
करवा चौथ व्रत कथा
सुहागिन स्त्रियों का सर्वाधिक पावन एवं प्रतिष्ठित निर्जला महाव्रत। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।
सम्पूर्ण एकादशी व्रत कथा व महात्म्य
पद्म पुराण में वर्णित एकादशी देवी की उत्पत्ति और एकादशी व्रत का सर्वोच्च महात्म्य। वर्ष की सभी 24 एकादशियों (निर्जला, देवशयनी, देवउठनी, उत्पन्ना आदि) में भगवान विष्णु की पूजा और अन्न त्याग का विधान है।


