श्री अयोध्या धाम - Shri Ayodhya Dham (Shri Ram Janmabhoomi)
🏛️ प्रथम मोक्षपुरी / राम जन्मभूमि

श्री अयोध्या धाम

Shri Ayodhya Dham (Shri Ram Janmabhoomi) • 📍 अयोध्या, उत्तर प्रदेश, भारत

सप्त मोक्षदायिका पुरियों में सर्वप्रमुख, सूर्यवंश की पावन राजधानी अयोध्या धाम भगवान श्री राम की परम पवित्र जन्मस्थली है। पावन सरयू के तट पर नव-निर्मित भव्य राम जन्मभूमि मंदिर सनातन गौरव का अनुपम प्रतीक है।

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अधिष्ठाता देव भगवान श्री रामलला सरकार (बाल स्वरूप) एवं माता सीता
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शक्ति / संगिनी माता जानकी (सीता जी)
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पवित्र नदी / सरोवर पावन सरयू नदी (नेत्रजा नदी)
ऐतिहासिक काल त्रेतायुग (वर्तमान भव्य राम जन्मभूमि मंदिर 22 जनवरी 2024 प्राण-प्रतिष्ठा)
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स्थापत्य शैली भव्य परंपरागत नागर वास्तुकला (गुलाबी बंसी पहाड़पुर बलुआ पत्थर)
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प्रमुख पर्व व उत्सव रामनवमी (सूर्य तिलक), दीपावली (भव्य दीपोत्सव), विवाह पंचमी, परिक्रमा
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🏛️ विस्तृत इतिहास एवं प्राचीन वास्तुकला (History & Architecture)

अयोध्या का ऐतिहासिक वैभव वाल्मीकि रामायण, स्कंद पुराण के अयोध्या महात्म्य और रघुवंश में वर्णित है। यह नगर वैवस्वत मनु द्वारा बसाया गया था। मध्यकाल में 1528 ईस्वी में मीर बाकी द्वारा मूल राम जन्मभूमि मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था। लगभग 500 वर्षों के अनवरत संघर्ष, बलिदान और कानूनी प्रक्रिया के उपरांत 9 नवंबर 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मति से राम जन्मभूमि पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय दिया।

22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में नव-निर्मित भव्य मंदिर में 51 इंच ऊंचे श्याम वर्ण 'बालक राम' विग्रह की अलौकिक प्राण-प्रतिष्ठा हुई। मंदिर परंपरागत नागर शैली में राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर से बिना लोहे या सीमेंट के बनाया गया है। मंदिर 380 फीट लंबा, 250 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊंचा है। इसमें कुल 392 भव्य नक्काशीदार स्तंभ और 44 सागौन के स्वर्ण-जड़ित कपाट हैं।

📜 पावन पौराणिक कथाएं एवं दिव्य लीलाएं (Sacred Legends)

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के अनुसार, चक्रवर्ती सम्राट दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिससे चैत्र शुक्ल नवमी के दिन अभिजीत मुहूर्त में साक्षात् भगवान श्री हरि विष्णु ने माता कौशल्या के गर्भ से श्री राम के रूप में अवतार लिया। चारों ओर पुष्पवृष्टि हुई और गंधर्व गाने लगे। अयोध्या की धूलि को छूने मात्र से करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

मान्यता है कि जब प्रभु श्री राम अपनी 11,000 वर्षों की पार्थिव लीला पूर्ण कर साकेत धाम पधारे, तो वे अयोध्या की संपूर्ण प्रजा, पशु-पक्षी और जनों सहित सरयू के गुप्तार घाट से परमधाम को प्रस्थान कर गए। सरयू नदी के जल का स्पर्श करने से ही जीव को वैकुंठ की प्राप्ति हो जाती है।

🌟 धार्मिक एवं आध्यात्मिक महात्म्य (Spiritual Significance)

सप्त पुरियों में अयोध्या को प्रथम स्थान प्राप्त है—'अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका। पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः॥' अयोध्या में रामलला के दर्शन, हनुमानगढ़ी में मत्था टेकने और सरयू स्नान से मनुष्य जन्म-मृत्यु के भवबंधन से मुक्त हो जाता है।

अयोध्या नाम नगरी तत्रासील्लोकविश्रुता। मनुना मानवेन्द्रेण या पुरी निर्मिता स्वयम्॥
भावार्थ: संसार में विख्यात अयोध्या नाम की एक महान नगरी है, जिसे साक्षात् मानवेंद्र मनु जी ने अपने कर-कमलों द्वारा स्वयं निर्मित किया था।

🛕 गर्भगृह, प्रमुख कुंड व दर्शनीय स्थल (Sacred Highlights)

✨ श्री राम जन्मभूमि मंदिर (Ram Janmabhoomi)

भगवान श्री रामलला का नवनिर्मित भव्य मंदिर, जहां रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें सीधे भगवान के मस्तक पर सूर्य तिलक करती हैं।

✨ हनुमानगढ़ी मंदिर (Hanumangarhi)

अयोध्या के रक्षक 76 सीढ़ियों पर स्थित बजरंगबली का सिद्ध किला, जहां दर्शन किए बिना रामलला का दर्शन अधूरा माना जाता है।

✨ कनक भवन (Kanak Bhawan)

माता कैकेयी द्वारा माता सीता को मुंहदिखाई में दिया गया स्वर्ण महल, जहां श्री सीताराम की अत्यंत मनोहारी युगल जोड़ी विराजित है।

✨ सरयू घाट व राम की पैड़ी (Sarayu Ghat & Ram Ki Paidi)

लाखों दीपों के विश्व रिकॉर्ड वाले दीपोत्सव का ऐतिहासिक घाट, जहां संध्या की भव्य सरयू आरती होती है।

✨ गुप्तार घाट (Guptar Ghat)

सरयू तट पर स्थित वह पावन स्थल जहां से प्रभु श्री राम ने साकेत गमन (जल समाधि) किया था।

⏰ दर्शन विधि, नियम एवं दैनिक आरती समय (Darshan & Timetable)

सर्वप्रथम सरयू नदी में पावन स्नान करें। इसके उपरांत अयोध्या के अधिपति श्री हनुमानगढ़ी जाकर बजरंगबली का दर्शन व आज्ञा प्राप्त करें। तदुपरांत भव्य जन्मभूमि पथ होते हुए श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन करें। इसके बाद कनक भवन, नागेश्वरनाथ और दशरथ महल के दर्शन करें।

आरती / पूजा अनुष्ठान निर्धारित समय
मंगला आरती (शृंगार पूर्व) प्रातः 04:30 - 05:00
शृंगार आरती प्रातः 06:30 - 07:00
राजभोग आरती दोपहर 12:00 - 12:30
संध्या आरती संध्या 07:30 - 08:00
शयन आरती व कपाट बंदी रात्रि 10:00 - 10:30
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🚗 सम्पूर्ण यात्रा मार्गदर्शिका (How to Reach & Accommodation)

✈️ हवाई मार्ग (By Air)

महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या धाम (AYJ) शहर से मात्र 8 किमी दूर है, जो दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, बेंगलुरु से सीधे जुड़ा है।

🚆 रेल मार्ग (By Train)

अयोध्या धाम जंक्शन (AY) और अयोध्या कैंट (AYC) भव्य आधुनिक स्टेशनों के रूप में विकसित हैं, जहां वंदे भारत सहित अनेक ट्रेनें आती हैं।

🚗 सड़क मार्ग (By Road)

लखनऊ (135 किमी), गोरखपुर (140 किमी), प्रयागराज (160 किमी) और वाराणसी (200 किमी) से उत्कृष्ट 4-लेन राजमार्ग उपलब्ध हैं।

🗓️ सर्वोत्तम यात्रा समय

अक्टूबर से मार्च का समय सबसे सुखद है। दीपावली के अवसर पर 25 लाख दीपों का दीपोत्सव और रामनवमी पर सूर्य तिलक दर्शन अद्भुत है।

🏨 आवास एवं धर्मशालाएं

अयोध्या में तीर्थ क्षेत्र पुरम, विभिन्न राज्यों की धर्मशालाएं, गुजराती समाज, बिड़ला धर्मशाला और आधुनिक होटल प्रचुर संख्या में हैं।

🌸 संबंधित पावन स्तोत्र, मंत्र व आरती (Related Prayers)

इस पावन तीर्थ के अधिष्ठाता देव की आराधना एवं नित्य पाठ हेतु प्रमुख स्तोत्र, मंत्र एवं आरतियां:

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

❓ हनुमानगढ़ी का दर्शन पहले क्यों किया जाता है?

मान्यता है कि लंका विजय के बाद प्रभु श्री राम ने हनुमान जी को अयोध्या की रक्षा का दायित्व सौंपा था। अतः अयोध्या में प्रवेश कर रामलला के दर्शन से पूर्व नगर कोतवाल हनुमान जी की आज्ञा लेना अनिवार्य माना जाता है।

❓ सूर्य तिलक क्या है?

आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एक ऑप्टोमैकेनिकल प्रणाली जिसके द्वारा प्रतिवर्ष रामनवमी के दिन ठीक दोपहर 12:00 बजे सूर्य की किरणें दर्पणों और लेंसों से परावर्तित होकर रामलला के ललाट पर 75 मिमी का सूर्य तिलक बनाती हैं।

❓ रामलला की मूर्ति किस पत्थर से बनी है?

रामलला की 51 इंच ऊंची मनोहारी प्रतिमा कर्नाटक के मैसूर से लाई गई लगभग 2.5 अरब वर्ष पुरानी कृष्ण शिला (काले पत्थर) से मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा गढ़ी गई है।

❓ राम की पैड़ी पर दीपोत्सव कब होता है?

प्रतिवर्ष कार्तिक अमावस्या (दीपावली की पूर्व संध्या पर) राम की पैड़ी और सरयू तट पर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाला भव्य दीपोत्सव आयोजित होता है, जिसमें 25 लाख से अधिक मिट्टी के दीप जलाए जाते हैं।

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