श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग - Shri Mallikarjuna Swamy Temple, Srisailam
🔱 द्वितीय ज्योतिर्लिंग / शक्तिपीठ

श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

Shri Mallikarjuna Swamy Temple, Srisailam • 📍 श्रीशैलम, नल्लामल्ला वन, नंद्याल जिला, आंध्र प्रदेश

कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर स्थित श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंगों में द्वितीय तथा 51 शक्तिपीठों में प्रमुख है, जिसे 'दक्षिण का कैलाश' कहा जाता है। यहां शिव और शक्ति का दुर्लभ एकाकार वास है।

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अधिष्ठाता देव भगवान मल्लिकार्जुन (शिव) एवं माता भ्रमराम्बा (शक्ति)
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शक्ति / संगिनी माता भ्रमराम्बा देवी (51 शक्तिपीठों में ग्रीवा पीठ)
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पवित्र नदी / सरोवर पावन कृष्णा नदी (पाताल गंगा) एवं नल्लामल्ला पर्वतमाला
ऐतिहासिक काल प्राचीन काल (सातवाहन, इक्ष्वाकु, काकतीय, विजयनगर साम्राज्य)
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स्थापत्य शैली द्रविड़ एवं विजयनगर वास्तुकला (विशाल गोपुरम व प्रस्तर प्राचीर)
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प्रमुख पर्व व उत्सव महाशिवरात्रि, ब्रह्मोत्सवम, उगादि, कार्तिकेय जयंती
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🏛️ विस्तृत इतिहास एवं प्राचीन वास्तुकला (History & Architecture)

श्रीशैलम के मल्लिकार्जुन मंदिर का ऐतिहासिक उल्लेख पहली शताब्दी के सातवाहन राजाओं के शिलालेखों में मिलता है। कालांतर में काकतीय महारानी रुद्रमादेवी और विजयनगर साम्राज्य के महान सम्राट श्री कृष्णदेवराय ने मंदिर का भव्य विस्तार किया। कृष्णदेवराय ने यहां 1516 ईस्वी में भव्य मुखमंडप और पश्चिमी गोपुरम का निर्माण कराया था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी 1677 में यहां आकर उत्तरी गोपुरम का निर्माण कराया था।

मंदिर की विशाल प्राचीर 20 फीट ऊंची और 600 फीट चौड़ी है, जिस पर रामायण और महाभारत के दृश्य पाषाण पर अत्यंत जीवंतता से उत्कीर्ण हैं। मुख्य गर्भगृह में छोटा स्वयंभू लिंगम प्रतिष्ठित है। गर्भगृह के ठीक पीछे माता भ्रमराम्बा देवी का भव्य शक्तिपीठ स्थित है। यह भारत के उन गिने-चुने पावन तीर्थों में से है, जहां ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही मंदिर प्रांगण में एक साथ स्थित हैं।

📜 पावन पौराणिक कथाएं एवं दिव्य लीलाएं (Sacred Legends)

शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता के अनुसार, जब भगवान कार्तिकेय और श्री गणेश के मध्य विवाह को लेकर प्रतिस्पर्धा हुई और गणेश जी ने माता-पिता की परिक्रमा कर पृथ्वी की प्रथम परिक्रमा का फल प्राप्त किया, तब कार्तिकेय जी रुष्ट होकर क्रौंच पर्वत (श्रीशैलम) पर चले गए। जब माता पार्वती और भगवान शिव उन्हें मनाने पहुंचे, तो कार्तिकेय जी और आगे चले गए।

तब अपने पुत्र के स्नेह में भगवान शिव 'अर्जुन' रूप में और माता पार्वती 'मल्लिका' (चमेली के फूल) रूप में वहीं ज्योति रूप में प्रतिष्ठित हो गईं। इसी कारण इस परम पावन तीर्थ का नाम 'मल्लिकार्जुन' पड़ा। यहां एक अन्य कथा के अनुसार, माता सती का ग्रीवा (गर्दन) भाग गिरा था, जिससे माता भ्रमराम्बा (भ्रमर अर्थात मधुमक्खी रूपी देवी) का प्राकट्य हुआ, जिन्होंने अरुणासुर नामक दानव का वध किया था।

🌟 धार्मिक एवं आध्यात्मिक महात्म्य (Spiritual Significance)

महाभारत के वनपर्व में कहा गया है कि श्रीशैल पर्वत के दर्शन मात्र से मनुष्य संपूर्ण पापों से मुक्त होकर अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है और अंत में शिवलोक को प्राप्त होता है। यहां पाताल गंगा में स्नान करने का अनंत गुना पुण्य बताया गया है।

द्युतिभ्राजदलंकारं शैलराजतनूद्भवम्। भजेहं मल्लिकार्जुनं भक्तरक्षणतत्परम्॥
भावार्थ: अलौकिक कांति से सुशोभित, पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती के साथ विराजित, भक्तों की रक्षा में सदैव तत्पर श्री मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

🛕 गर्भगृह, प्रमुख कुंड व दर्शनीय स्थल (Sacred Highlights)

✨ पाताल गंगा (Patala Ganga)

पहाड़ से नीचे बहती पावन कृष्णा नदी, जहां पहुंचने हेतु सीढ़ियां और रोप-वे की सुविधा उपलब्ध है। यहां स्नान अत्यंत पावन माना जाता है।

✨ भ्रमराम्बा देवी शक्तिपीठ (Bhramaramba Temple)

मंदिर परिसर में स्थित अष्टदश महाशक्तिपीठ, जहां देवी के गर्भगृह से भौरों की गूंज सुनाई देने की अलौकिक मान्यता है।

✨ शिखारेकश्वर मंदिर (Shikhareswara Swamy)

श्रीशैलम की सबसे ऊंची चोटी, जिसके शिखर से नंदी के सींगों के मध्य से मल्लिकार्जुन मंदिर का शिखर देखने पर मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।

✨ साक्षी गणपति (Sakshi Ganapathi)

मंदिर मार्ग पर स्थित गणपति मंदिर, जो भगवान शिव के समक्ष इस बात की गवाही देते हैं कि भक्त ने श्रीशैलम की यात्रा की है।

⏰ दर्शन विधि, नियम एवं दैनिक आरती समय (Darshan & Timetable)

सर्वप्रथम पाताल गंगा में पवित्र स्नान करें। तत्पश्चात साक्षी गणपति के दर्शन कर मुख्य मंदिर में प्रवेश करें। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन एवं स्पर्श पूजा की विशेष अनुमति नियत समय पर दी जाती है। इसके उपरांत माता भ्रमराम्बा शक्तिपीठ के दर्शन कर श्रीशैल पर्वत की प्रदक्षिणा करें।

आरती / पूजा अनुष्ठान निर्धारित समय
सुप्रभातम् व मंगल आरती प्रातः 04:30 - 05:00
सर्वदर्शनम् व महाअभिषेक प्रातः 06:00 - 01:00
संध्या धूप व आरती संध्या 05:30 - 07:00
एकान्त सेवा व शयन आरती रात्रि 09:30 - 10:00
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🚗 सम्पूर्ण यात्रा मार्गदर्शिका (How to Reach & Accommodation)

✈️ हवाई मार्ग (By Air)

निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (हैदराबाद) लगभग 215 किमी दूर है।

🚆 रेल मार्ग (By Train)

निकटतम रेलवे स्टेशन मरकापुर रोड (लगभग 85 किमी) है। हैदराबाद और विजयवाड़ा प्रमुख जंक्शन हैं।

🚗 सड़क मार्ग (By Road)

हैदराबाद, विजयवाड़ा, तिरुपति और कुरनूल से नल्लामल्ला वन के मनोरम घाट रोड होते हुए बसें व टैक्सियां उपलब्ध हैं।

🗓️ सर्वोत्तम यात्रा समय

सितंबर से मार्च का समय सबसे अनुकूल रहता है। महाशिवरात्रि पर 7 दिवसीय ब्रह्मोत्सवम अत्यंत भव्य होता है।

🏨 आवास एवं धर्मशालाएं

श्रीशैलम देवस्थानम के गंगा-सदन, शिव सदन, विभिन्न भाषाई मठ (कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु) और निजी होटल उपलब्ध हैं।

🌸 संबंधित पावन स्तोत्र, मंत्र व आरती (Related Prayers)

इस पावन तीर्थ के अधिष्ठाता देव की आराधना एवं नित्य पाठ हेतु प्रमुख स्तोत्र, मंत्र एवं आरतियां:

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

❓ क्या मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को स्पर्श करने की अनुमति है?

हाँ, श्रीशैलम में विशिष्ट समय पर निर्धारित वेशभूषा (धोती व उत्तरीय) में भक्तों को गर्भगृह में जाकर ज्योतिर्लिंग को अपने हाथों से स्पर्श कर अभिषेक करने की अनुमति मिलती है।

❓ श्रीशैलम को दक्षिण का कैलाश क्यों कहते हैं?

स्कंद पुराण के अनुसार जो पुण्य हिमालय के कैलाश दर्शन से मिलता है, वही पुण्य दक्षिण में श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती के सानिध्य से प्राप्त होता है।

❓ साक्षी गणपति का क्या महत्व है?

मान्यता है कि जब कोई श्रद्धालु श्रीशैलम आता है, तो साक्षी गणपति भगवान शिव के दरबार में उसकी उपस्थिति दर्ज करते हैं।

❓ पाताल गंगा तक कैसे पहुंचा जाता है?

मंदिर से पाताल गंगा तक लगभग 850 सीढ़ियां उतरकर जाया जा सकता है, अथवा देवस्थानम द्वारा संचालित आधुनिक रोप-वे (केबल कार) द्वारा मात्र 5 मिनट में पहुंचा जा सकता है।

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