Lord Shiva (देवाधिदेव भगवान शिव)
🛕 Lord Shiva (देवाधिदेव भगवान शिव)

श्री रुद्राष्टकम्

Shri Rudrashtakam

श्रीरामचरितमानस के उत्तरकांड में काकभुशुण्डि जी के गुरु द्वारा उच्चारित भगवान आशुतोष शिव का यह परम प्रिय स्तोत्र कालभय, रोग और समस्त क्लेशों को शांत करता है।

🕉️ ॥ श्री रुद्राष्टकम् ॥

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्॥

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥ १ ॥

🌸 ॐ 🌸

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं। गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्॥

करालं महाकालकालं कृपालं। गुणागारसंसारपारं नतोऽहम्॥ २ ॥

🌸 ॐ 🌸

तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं। मनोभूतकोटिप्रभाश्री शरीरम्॥

स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥ ३ ॥

🌸 ॐ 🌸

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्॥

मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि॥ ४ ॥

🌸 ॐ 🌸

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम्॥

त्रयःशूलनिर्मूलनं शूलपाणिं। भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्॥ ५ ॥

🌸 ॐ 🌸

कलातीतकल्याण कल्पान्तकारी। सदा सज्जनान्ददाता पुरारी॥

चिदानन्दसन्दोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥ ६ ॥

🌸 ॐ 🌸

न यावद् उमानाथपादारविन्दं। भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्॥

न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम्॥ ७ ॥

🌸 ॐ 🌸

न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम्॥

जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो॥ ८ ॥

🌸 ॐ 🌸
🕉️ ॥ समर्पणम् ॥

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

हे ईशान! हे मोक्ष स्वरूप, सर्वव्यापी, सच्चिदानंद ब्रह्म! मैं आपको प्रणाम करता हूँ। आप महाकाल के भी काल, दयालु और संसार से पार ले जाने वाले हैं। जब तक मनुष्य आपके चरण कमलों का भजन नहीं करता, तब तक उसे न सुख मिलता है, न शांति, और न ही संतापों से मुक्ति मिलती है। हे शम्भू! मैं योग, जप और पूजा कुछ नहीं जानता, केवल आपके शरणागत हूँ, मेरी रक्षा कीजिए।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ रुद्राष्टकम के रचयिता कौन हैं?

श्री रुद्राष्टकम गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के उत्तरकांड में वर्णित है।

❓ रुद्राष्टकम का पाठ कब करना चाहिए?

सोमवार, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि पर शिवलिंग के अभिषेक के समय इसका पाठ सर्वोत्तम फल देता है।