श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग - Shri Kashi Vishwanath Temple, Varanasi
🔱 सप्तम ज्योतिर्लिंग / मोक्षपुरी

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग

Shri Kashi Vishwanath Temple, Varanasi • 📍 वाराणसी (बनारस), उत्तर प्रदेश, भारत

संसार की सबसे प्राचीन जीवित नगरी काशी में उत्तरवाहिनी पावन गंगा के तट पर स्थित श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सातवां तथा सप्त मोक्षदायिका पुरियों का मुकुटमणि है। मान्यता है कि काशी भगवान शिव के त्रिशूल की नोक पर टिकी है।

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अधिष्ठाता देव भगवान विश्वनाथ (विश्वेश्वर महादेव - काशी के स्वामी)
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शक्ति / संगिनी माता अन्नपूर्णा (भवानी) एवं विशालाक्षी (शक्तिपीठ)
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पवित्र नदी / सरोवर उत्तरवाहिनी पावन गंगा नदी एवं ज्ञानवापी कूप
ऐतिहासिक काल अनादि काल (अहिल्याबाई होल्कर द्वारा 1780 में वर्तमान मंदिर, 2021 में भव्य कॉरिडोर)
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स्थापत्य शैली नागर वास्तुकला (स्वर्ण शिखर - महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1 टन स्वर्ण दान)
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प्रमुख पर्व व उत्सव महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, देव दीपावली, सावन सोमवार
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🏛️ विस्तृत इतिहास एवं प्राचीन वास्तुकला (History & Architecture)

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास सनातन धर्म की निरंतरता का प्रतीक है। महाभारत और स्कंद पुराण के काशी खंड में विश्वनाथ जी का विस्तृत महात्म्य वर्णित है। मध्यकाल में कुतुबुद्दीन ऐबक, हुसैन शाह शर्की और औरंगजेब द्वारा इस मंदिर पर बारंबार आक्रमण कर इसे क्षति पहुंचाई गई। 1780 ईस्वी में मालवा की धर्मपरायण महारानी पुण्यश्लोका अहिल्याबाई होल्कर ने वर्तमान मुख्य मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण कराया।

1835 में पंजाब केसरी महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के दोनों शिखरों को 1,000 किलोग्राम (1 टन) शुद्ध स्वर्ण से मढ़वाया, जिसके बाद यह 'स्वर्ण मंदिर' कहलाया। दिसंबर 2021 में नव-निर्मित 5 लाख वर्ग फुट का भव्य 'श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर' लोकार्पित हुआ, जिसने गंगा तट (ललिता घाट) से सीधे मंदिर गर्भगृह को एक अलौकिक मार्ग से जोड़ दिया। गर्भगृह में स्थित ज्योतिर्लिंग चांदी की वेदी पर प्रतिष्ठापित है, जिसके दर्शन हेतु प्रतिदिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं।

📜 पावन पौराणिक कथाएं एवं दिव्य लीलाएं (Sacred Legends)

स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में जब संपूर्ण ब्रह्मांड जलमग्न था, तब भगवान शिव और माता पार्वती ने आनंदवन (काशी) का निर्माण किया। भगवान शिव ने स्वयं कहा—'यह मेरी आनंदकानन नगरी है, जो प्रलय काल में भी कभी नष्ट नहीं होगी। जब संपूर्ण सृष्टि का संहार होगा, तब मैं इस नगरी को अपने त्रिशूल की नोक पर उठा लूंगा।'

काशी में मृत्यु को प्राप्त होने वाले प्रत्येक जीव के कान में स्वयं देवाधिदेव महादेव 'तारक मंत्र' (राम नाम) फूंकते हैं, जिससे उसे तत्काल मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। एक अन्य कथा के अनुसार, जब भगवान शिव भिक्षाटन हेतु निकले, तो काशी में उन्हें कहीं भिक्षा नहीं मिली। तब माता पार्वती ने अन्नपूर्णा रूप धारण कर महादेव को भिक्षा प्रदान की और वरदान दिया कि काशी में कोई भी प्राणी कभी भूखा नहीं सोएगा।

🌟 धार्मिक एवं आध्यात्मिक महात्म्य (Spiritual Significance)

काशी के समान कोई तीर्थ नहीं और विश्वनाथ के समान कोई देव नहीं—'वाराणस्यां सदा सन्निहितः शिवः।' काशी में गंगा स्नान, अन्नपूर्णा का दर्शन और विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का स्पर्श करने से मनुष्य पुनर्जन्म के बंधन से सदा के लिए मुक्त हो जाता है।

वाराणसीपुरपते भज विश्वनाथं पूर्णानवेन हृदयेन सदा स्मरन्तम्। संसारदुःखदहनेन विमोचनाय काशीपतिं भज मनो शिवरूपमीशम्॥
भावार्थ: वाराणसी के स्वामी, संसार के समस्त दुःखों की ज्वाला से मुक्ति दिलाने वाले, साक्षात् शिव स्वरूप काशीपति श्री विश्वनाथ का तुम शुद्ध अंतःकरण से निरंतर भजन करो।

🛕 गर्भगृह, प्रमुख कुंड व दर्शनीय स्थल (Sacred Highlights)

✨ श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर (Vishwanath Corridor)

गंगा तट से मंदिर तक 50,000 वर्ग मीटर में फैला भव्य सांस्कृतिक प्रांगण, जिसमें म्यूजियम, वैदिक पुस्तकालय और यात्री सुविधा केंद्र हैं।

✨ माता अन्नपूर्णा मंदिर (Maa Annapurna Temple)

विश्वनाथ मंदिर के समीप स्थित वह मंदिर जहां मां अन्नपूर्णा ने स्वयं शिवजी को भिक्षा दी थी। धनतेरस पर स्वर्ण विग्रह के दर्शन होते हैं।

✨ दशाश्वमेध घाट व भव्य गंगा आरती (Dashashwamedh Ghat)

काशी का सबसे पावन घाट जहां ब्रह्मा जी ने 10 अश्वमेध यज्ञ किए थे। प्रतिदिन संध्या को होने वाली अलौकिक गंगा आरती विश्वप्रसिद्ध है।

✨ मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat)

महाश्मशान जहां चिता की अग्नि कभी शांत नहीं होती। यहां देह त्याग करने पर साक्षात् मोक्ष मिलता है।

✨ काल भैरव मंदिर (Kaal Bhairav)

काशी के कोतवाल, जिनके दर्शन के बिना काशी विश्वनाथ यात्रा अधूरी मानी जाती है।

⏰ दर्शन विधि, नियम एवं दैनिक आरती समय (Darshan & Timetable)

सर्वप्रथम दशाश्वमेध घाट या मणिकर्णिका घाट पर गंगा स्नान करें। गंगाजल लेकर ललिता घाट होते हुए भव्य कॉरिडोर से काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश करें। गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग पर गंगाजल व बिल्वपत्र अर्पित करें। इसके बाद माता अन्नपूर्णा, विशालाक्षी शक्तिपीठ और अंत में काशी के कोतवाल काल भैरव के दर्शन अवश्य करें।

आरती / पूजा अनुष्ठान निर्धारित समय
मंगला आरती प्रातः 03:00 - 04:00
भोग आरती (मध्याह्न) दोपहर 11:15 - 12:20
सप्तऋषि आरती संध्या 07:00 - 08:15
शृंगार आरती रात्रि 09:00 - 10:15
शयन आरती व कपाट बंदी रात्रि 10:30 - 11:00
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🚗 सम्पूर्ण यात्रा मार्गदर्शिका (How to Reach & Accommodation)

✈️ हवाई मार्ग (By Air)

लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (बाबतपुर, वाराणसी) शहर से लगभग 26 किमी दूर है, जो सभी बड़े शहरों से जुड़ा है।

🚆 रेल मार्ग (By Train)

वाराणसी जंक्शन (कैंट), बनारस (मंडुवाडीह) और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय) से देश भर की ट्रेनें उपलब्ध हैं।

🚗 सड़क मार्ग (By Road)

राष्ट्रीय राजमार्ग NH-19 (जीटी रोड) और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे द्वारा लखनऊ, प्रयागराज, पटना और दिल्ली से सीधी बसें व टैक्सियां हैं।

🗓️ सर्वोत्तम यात्रा समय

अक्टूबर से मार्च का मौसम सुखद रहता है। देव दीपावली (कार्तिक पूर्णिमा) पर संपूर्ण काशी लाखों दीपों से जगमगा उठती है।

🏨 आवास एवं धर्मशालाएं

काशी में विश्वनाथ धाम यात्री निवास, विभिन्न राज्यों की मारवाड़ी, गुजराती, बंगाली धर्मशालाएं और सैकड़ों होटल उपलब्ध हैं।

🌸 संबंधित पावन स्तोत्र, मंत्र व आरती (Related Prayers)

इस पावन तीर्थ के अधिष्ठाता देव की आराधना एवं नित्य पाठ हेतु प्रमुख स्तोत्र, मंत्र एवं आरतियां:

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

❓ सप्तऋषि आरती क्या है और इसका क्या महत्व है?

प्रतिदिन संध्या 7:00 बजे सात अलग-अलग गोत्रों के ब्राह्मण अर्चक एक साथ मिलकर विश्वनाथ जी की विशेष आरती करते हैं। मान्यता है कि यह परंपरा प्राचीन काल में सप्तर्षियों द्वारा आरंभ की गई थी।

❓ विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद क्या बदलाव आया है?

अब श्रद्धालु सीधे गंगा में स्नान कर ललिता घाट से बिना किसी संकरी गली के सीधे खुले, भव्य और वातानुकूलित कॉरिडोर से 5 मिनट में विश्वनाथ मंदिर पहुंच सकते हैं।

❓ काशी में काल भैरव का दर्शन क्यों अनिवार्य है?

भगवान शिव ने काल भैरव को काशी का दंडाधिकारी (कोतवाल) नियुक्त किया है। मान्यता है कि काल भैरव के दर्शन और अनुमति के बिना काशी यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

❓ रंगभरी एकादशी का काशी में क्या महत्व है?

फाल्गुन शुक्ल एकादशी पर भगवान विश्वनाथ माता पार्वती का गौना कराकर काशी लाते हैं। इस दिन संपूर्ण काशी में गुलाल और अबीर उड़ाकर भव्य होली उत्सव मनाया जाता है।

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