श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग - Shri Grishneshwar (Ghushmeshwar) Jyotirlinga, Ellora
🔱 द्वादश ज्योतिर्लिंग / अंतिम ज्योतिर्लिंग

श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

Shri Grishneshwar (Ghushmeshwar) Jyotirlinga, Ellora • 📍 वेरुल गांव, एलोरा गुफाओं के समीप, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र

विश्वप्रसिद्ध एलोरा की ऐतिहासिक गुफाओं के समीप स्थित श्री घृष्णेश्वर (घुश्मेश्वर) ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की पावन श्रृंखला का बारहवां एवं अंतिम ज्योतिर्लिंग है। यह मंदिर एक अनन्य शिवभक्त नारी 'घुश्मा' की अगाध भक्ति और ममता का अमर तीर्थ है।

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अधिष्ठाता देव भगवान घृष्णेश्वर (घुश्मेश्वर महादेव - 12वां ज्योतिर्लिंग)
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शक्ति / संगिनी माता पार्वती एवं घुश्मा
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पवित्र नदी / सरोवर शिवालय सरोवर एवं येलगंगा नदी
ऐतिहासिक काल 18वीं शताब्दी (महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्मित)
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स्थापत्य शैली दक्षिण भारतीय एवं मालवा नागर वास्तुकला (लाल बेसाल्ट पत्थर से निर्मित)
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प्रमुख पर्व व उत्सव महाशिवरात्रि, सावन सोमवार, त्रिपुरारी पूर्णिमा, एलोरा उत्सव
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🏛️ विस्तृत इतिहास एवं प्राचीन वास्तुकला (History & Architecture)

घृष्णेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक पुनर्निर्माण 16वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज के दादाजी मालोजी राजे भोसले (वेरुल के पाटिल) द्वारा कराया गया था, जिन्होंने शिवालय सरोवर का जीर्णोद्धार भी किया। कालांतर में मध्यकाल में क्षतिग्रस्त होने के पश्चात 18वीं शताब्दी में मालवा की महारानी पुण्यश्लोका अहिल्याबाई होल्कर ने लाल बेसाल्ट पाषाण से वर्तमान 5 मंजिला भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।

मंदिर की वास्तुकला अत्यंत उत्कृष्ट है। मंदिर का मुख्य शिखर 5 मंजिला है, जिस पर सूक्ष्म नक्काशी और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। मंदिर के सभा मंडप में 24 नक्काशीदार प्रस्तर खंभे हैं। गर्भगृह पूर्वाभिमुखी है, जहां जलहरी पर स्वयंभू घृष्णेश्वर शिवलिंग विराजमान है। मंदिर के ठीक सामने लाल पत्थर से निर्मित एक अत्यंत नक्काशीदार नंदी मंडप है। मंदिर से मात्र 1 किमी की दूरी पर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'एलोरा की गुफाएं' (कैलाश मंदिर) स्थित हैं।

📜 पावन पौराणिक कथाएं एवं दिव्य लीलाएं (Sacred Legends)

शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता के अनुसार, देवगिरि पर्वत के समीप सुधर्मा नामक एक धर्मात्मा ब्राह्मण अपनी पत्नी सुदेहा के साथ रहते थे। वे निःसंतान थे। सुदेहा के आग्रह पर सुधर्मा ने अपनी छोटी बहन 'घुश्मा' से दूसरा विवाह किया। घुश्मा परम शिवभक्त थी। वह प्रतिदिन 101 पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिपूर्वक पूजन करती और उन्हें समीप के सरोवर में विसर्जित करती थी।

भगवान शिव की कृपा से घुश्मा को एक अत्यंत सुंदर और तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। समय बीतने पर जब पुत्र का विवाह हुआ, तो ईर्ष्या की अग्नि में जलकर सुदेहा ने रात्रि में सोते समय उस बालक का वध कर दिया और उसके शव को उसी सरोवर में फेंक दिया जहां घुश्मा शिवलिंग विसर्जित करती थी। प्रातः जब रक्त देखकर हाहाकार मच गया, तब भी घुश्मा विचलित नहीं हुई और नित्य की भांति 'ॐ नमः शिवाय' जपते हुए पार्थिव लिंगों को विसर्जित करने सरोवर पहुंची।

जैसे ही उसने शिवलिंगों को जल में प्रवाहित किया, उसका मृत पुत्र जीवित होकर सरोवर से मुस्कुराते हुए बाहर आ गया। उसी क्षण देवाधिदेव महादेव साक्षात प्रकट हो गए और सुदेहा का वध करने हेतु त्रिशूल उठाया। किंतु करुणामयी घुश्मा ने हाथ जोड़कर अपनी जेठानी को क्षमा करने की याचना की। घुश्मा की इस अलौकिक क्षमा और अनन्य भक्ति से अभिभूत होकर भगवान शिव ने वरदान दिया कि वे सदैव उसी सरोवर के तट पर घुश्मा के नाम से 'घुश्मेश्वर' (घृष्णेश्वर) ज्योतिर्लिंग के रूप में निवास करेंगे।

🌟 धार्मिक एवं आध्यात्मिक महात्म्य (Spiritual Significance)

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में अंतिम श्लोक घृष्णेश्वर का आता है—'इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम्।' घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन से निसंतान दंपतियों को सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, समस्त पारिवारिक कलह शांत होते हैं और द्वादश ज्योतिर्लिंगों की संपूर्ण यात्रा का फल प्राप्त होता है।

इलापुरे रम्यविशालकेऽस्मिन् समुल्लसन्तं च जगद्वरेण्यम्। वन्दे महोदारतरस्वभावं घृष्णेश्वराख्यं शरणं प्रपद्ये॥
भावार्थ: रमणीय इलापुर (वेरुल) में संपूर्ण जगत में वंदनीय, अत्यंत उदार स्वभाव वाले भगवान श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की मैं वंदना करता हूँ और उनकी शरण में जाता हूँ।

🛕 गर्भगृह, प्रमुख कुंड व दर्शनीय स्थल (Sacred Highlights)

✨ शिवालय सरोवर (Shivalaya Sarovar)

मंदिर के समीप स्थित वह पावन सरोवर जहां भक्त घुश्मा पार्थिव शिवलिंग विसर्जित करती थी और जहां उसका मृत पुत्र पुनः जीवित हुआ था।

✨ एलोरा की गुफाएं व कैलाश मंदिर (Ellora Caves)

मंदिर से मात्र 1 किमी दूर, एक ही विशाल पहाड़ को ऊपर से नीचे काटकर तराशा गया विश्व का सबसे बड़ा एकाश्म प्रस्तर मंदिर (कैलाश मंदिर)।

✨ दौलताबाद किला (Daulatabad Fort)

घृष्णेश्वर से 15 किमी दूर स्थित प्राचीन देवगिरि दुर्ग, जो अभेद्य सैन्य वास्तुकला का ऐतिहासिक प्रतीक है।

✨ घृष्णेश्वर नंदी मंडप (Nandi Mandap)

लाल पाषाण से निर्मित भव्य मंडप जिसमें नक्काशीदार नंदी महाराज विराजमान हैं।

⏰ दर्शन विधि, नियम एवं दैनिक आरती समय (Darshan & Timetable)

पुरुषों को गर्भगृह में प्रवेश हेतु अपनी कमर से ऊपर के वस्त्र (शर्ट, बनियान) उतारने होते हैं और चमड़े की वस्तुएं (बेल्ट, पर्स) बाहर रखनी होती हैं। गर्भगृह में श्रद्धालु ज्योतिर्लिंग को अपने हाथों से जल व दुग्ध अर्पित कर स्पर्श पूजा कर सकते हैं। महिलाओं हेतु गर्भगृह में दर्शन की सुगम व्यवस्था है।

आरती / पूजा अनुष्ठान निर्धारित समय
मंगला आरती प्रातः 05:30 - 06:00
जलाभिषेक व सामान्य दर्शन प्रातः 06:00 - दोपहर 12:00
मध्याह्न भोग आरती दोपहर 12:30 - 01:00
संध्या शृंगार आरती संध्या 07:30 - 08:15
शयन आरती व कपाट बंदी रात्रि 09:30 - 10:00
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🚗 सम्पूर्ण यात्रा मार्गदर्शिका (How to Reach & Accommodation)

✈️ हवाई मार्ग (By Air)

निकटतम हवाई अड्डा छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) लगभग 30 किमी दूर है, जो मुंबई और दिल्ली से सीधी उड़ानों से जुड़ा है।

🚆 रेल मार्ग (By Train)

छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) रेलवे स्टेशन (लगभग 30 किमी) और मनमाड जंक्शन (लगभग 95 किमी) प्रमुख स्टेशन हैं।

🚗 सड़क मार्ग (By Road)

औरंगाबाद केंद्रीय बस स्टैंड से एलोरा-घृष्णेश्वर हेतु हर 20 मिनट पर सरकारी बसें, सिटी बसें और टैक्सियां उपलब्ध हैं।

🗓️ सर्वोत्तम यात्रा समय

अक्टूबर से मार्च का मौसम सुखद रहता है। एलोरा-अजंता अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव के समय विशेष रौनक रहती है।

🏨 आवास एवं धर्मशालाएं

एमटीडीसी (MTDC) एलोरा, घृष्णेश्वर ट्रस्ट की धर्मशालाएं, वेरुल गांव के गेस्ट हाउस और औरंगाबाद शहर के विभिन्न होटल उपलब्ध हैं।

🌸 संबंधित पावन स्तोत्र, मंत्र व आरती (Related Prayers)

इस पावन तीर्थ के अधिष्ठाता देव की आराधना एवं नित्य पाठ हेतु प्रमुख स्तोत्र, मंत्र एवं आरतियां:

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

❓ घृष्णेश्वर को 12वां ज्योतिर्लिंग क्यों कहा जाता है?

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में सोमनाथ से आरंभ होकर बारहवां और अंतिम श्लोक 'घृष्णेश्वर' का ही है। इस प्रकार घृष्णेश्वर दर्शन से द्वादश ज्योतिर्लिंगों की परिक्रमा पूर्ण होती है।

❓ गर्भगृह में प्रवेश का क्या ड्रेस कोड है?

घृष्णेश्वर के गर्भगृह में प्रवेश कर स्पर्श दर्शन करने हेतु पुरुषों को ऊपरी वस्त्र (शर्ट, बनियान) उतारने होते हैं और चमड़े का बेल्ट वर्जित होता है। बाहर से सामान्य दर्शन बिना वस्त्र उतारे किए जा सकते हैं।

❓ एलोरा का कैलाश मंदिर घृष्णेश्वर से कितनी दूरी पर है?

एलोरा गुफा संख्या 16 (कैलाश मंदिर) घृष्णेश्वर मंदिर से मात्र 1.2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दोनों का दर्शन एक ही यात्रा में सुगमता से हो जाता है।

❓ घृष्णेश्वर मंदिर का निर्माण किस पत्थर से हुआ है?

यह मंदिर स्थानीय लाल रंग के बेसाल्ट प्रस्तर से निर्मित है, जिसे महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने तराश कर बनवाया था।

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