श्री एकादशी व्रत एवं भगवान विष्णु पूजन विधि (घर पर)
Ekadashi Vrat & Lord Vishnu Pooja Vidhi (At Home)
सनातन धर्म में एकादशी व्रत को समस्त व्रतों का राजा माना गया है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु की विधिवत पूजा और व्रत करने से समस्त पापों का क्षय होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
एकादशी व्रत सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ है। यह चित्त को शुद्ध, इन्द्रियों को संयमित और आत्मा को भगवान विष्णु के पावन धाम वैकुंठ की ओर अग्रसर करता है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ एकादशी के दिन क्या नहीं खाना चाहिए?
एकादशी के दिन चावल, अन्न, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करना चाहिए। केवल फलाहार ही ग्रहण करें।
❓ एकादशी का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि के सूर्योदय के पश्चात और हरिवासर समाप्त होने के बाद शुभ मुहूर्त में ही पारण करना चाहिए।
🪔 प्रभु वंदन की दृष्टि से: व्रत कैसे तोड़ा जाए, यह उतना ही महत्वपूर्ण है
एकादशी व्रत विधि में पारण (व्रत खोलने की विधि) को विशेष नियमों और समय के साथ बताया गया है — यह कोई साधारण, मनमाना कार्य नहीं, बल्कि उतना ही सुव्यवस्थित है जितना व्रत प्रारंभ करने की विधि।
यह बात महत्वपूर्ण है क्योंकि हम प्रायः किसी भी संकल्प या अनुशासन को शुरू करने पर तो ध्यान देते हैं, परन्तु उसे समाप्त करने या उससे बाहर निकलने की प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। एकादशी व्रत हमें सिखाता है कि किसी भी कठिन अनुशासन से सही, सुव्यवस्थित ढंग से बाहर निकलना भी उतना ही आवश्यक है जितना उसमें प्रवेश करना।
यह विधि इसीलिए एक व्यापक सीख देती है — चाहे वह कोई उपवास हो, कोई परियोजना हो या जीवन का कोई चरण, उसे जल्दबाज़ी में समाप्त करने के बजाय सुनियोजित और सम्मानजनक ढंग से पूर्ण करना चाहिए।
आज का पंचांग एवं शुभ मुहूर्त
पूजा एवं व्रत के लिए आज की शुभ तिथि, अभिजित मुहूर्त एवं चौघड़िया देखें।

