दीपावली महालक्ष्मी एवं श्री गणेश पूजन विधि (प्रदोष काल)
Diwali Lakshmi-Ganesh Pooja Vidhi (Pradosh Kaal)
दीपावली की निशा में स्थिर लग्न व प्रदोष काल में माँ महालक्ष्मी, श्री गणेश एवं धन के अधिपति कुबेर जी की पूजा से घर में वर्ष भर अखंड सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
🕉️ ॥ चौकी स्थापना एवं वेदी सज्जा ॥
चौकी की पवित्र स्थापना:
विधि: उत्तर या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल रेशमी वस्त्र बिछाएं। दाईं ओर माँ लक्ष्मी और बाईं ओर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। पास में कलश व अखंड दीपक रखें।
📿 मंत्र: ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
🕉️ ॥ दीपावली पूजन के पावन चरण ॥
१. पवित्रीकरण एवं संकल्प:
विधि: बाएं हाथ में जल लेकर दाएं हाथ से स्वयं पर और पूजा सामग्री पर छिड़कें। हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर वर्ष पर्यंत सुख-समृद्धि का संकल्प लें।
📿 मंत्र: ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
२. श्री गणेश एवं कलश पूजन:
विधि: सबसे पहले विघ्नहर्ता गणेश जी को दूर्वा, रोली, अक्षत और मोदक चढ़ाएं। तत्पश्चात कलश पर स्वास्तिक बनाकर आम के पल्लव व नारियल का पूजन करें।
📿 मंत्र: ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
३. माँ महालक्ष्मी का पंचोपचार / षोडशोपचार:
विधि: माँ लक्ष्मी को कमल का पुष्प, गुलाब, रोली, कमलगट्टा, कौड़ी, इत्र और लाल चुनरी अर्पित करें।
📿 मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः। कमलपुष्पं समर्पयामि॥
४. कुबेर जी एवं बही-खाता / कलम पूजन:
विधि: व्यापारिक बही-खाते, तिजोरी की चाबी, कलम और धन के स्वामी कुबेर जी पर रोली-अक्षत अर्पित कर धूप दिखाएं।
📿 मंत्र: ॐ कुबेराय नमः। धनधान्याधिपतये नमः॥
५. खील-बताशा एवं नैवेद्य अर्पण:
विधि: नई धान के ताजे खील, बताशे, शुद्ध घी की मिठाई, खीर और फल अर्पित करें।
📿 मंत्र: ॐ महालक्ष्म्यै नमः, नैवेद्यं फलानि च समर्पयामि॥
६. दीप मालिका प्रज्वलन (२१ या ११ दीपक):
विधि: एक बड़ा चौमुखा सरसों या तिल के तेल का दीपक घर के मुख्य द्वार व मंदिर के लिए जलाएं। शेष छोटे दीपकों में घी या तेल डालकर पूरे घर में प्रकाश फैलाएं।
📿 मंत्र: शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥
७. महालक्ष्मी आरती एवं क्षमा याचना:
विधि: ॐ जय लक्ष्मी माता की आरती गाएं और हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि माँ सदा आपके घर में स्थिर रूप से वास करें।
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
दीपावली पूजन केवल धन का उत्सव नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार पर ज्ञान और सद्बुद्धि के प्रकाश की विजय है। माँ लक्ष्मी के साथ गणेश जी की पूजा यह सिखाती है कि बुद्धि और विवेक के बिना आया हुआ धन टिकता नहीं है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ दिवाली पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त कौन सा होता है?
दीपावली पूजन के लिए सूर्यास्त के बाद का 'प्रदोष काल' और 'वृषभ स्थिर लग्न' सर्वोत्तम माना गया है, जिसमें माँ लक्ष्मी का घर में स्थिर वास होता है।
❓ दिवाली पूजा में खील-बताशे क्यों चढ़ाए जाते हैं?
खील (धान का फूला) शरद ऋतु की नई फसल का प्रथम प्रतीक है, जिसे माँ अन्नपूर्णा और लक्ष्मी जी को कृतज्ञता स्वरूप समर्पित किया जाता है।

