शिव कैलाशों के वासी (धौलीधारों के राजा)
Shiv Kailasho Ke Vasi
कैलाश पर्वत और धौलाधार की पावन चोटियों पर विराजने वाले भोले भंडारी महादेव का यह पारंपरिक भजन अत्यंत पावन और मनमोहक है।
🕉️ ॥ ध्रुवपद ॥
शिव कैलाशों के वासी, धौलीधारों के राजा।
शंकर संकट हरना, शंकर संकट हरना॥
🌸 ॐ 🌸
🕉️ ॥ पद १ ॥
तेरे दर पे जो भी आया,
उसने मनवांछित फल पाया।
भस्म रमाये जटा में गंगा,
गले में सर्पों की माला।
शिव कैलाशों के वासी...
🌸 ॐ 🌸
🕉️ ॥ पद २ ॥
भोलेनाथ डमरू बजावे,
सारे जग को नाच नचावे।
करुणा सागर हे त्रिपुरारी,
रक्षा करो हमारी।
शिव कैलाशों के वासी...
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
हे कैलाश पर्वत के अधिपति और धौलाधार के राजा भगवान शंकर! आप भक्तों के समस्त संकटों को हरने वाले और सर्वत्र कल्याण करने वाले हैं।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ यह भजन किस क्षेत्र का पारंपरिक भजन है?
यह हिमालयी क्षेत्र (हिमाचल व उत्तराखंड) का अत्यंत प्रसिद्ध लोक-पारंपरिक शिव भजन है जो आज पूरे भारत में लोकप्रिय है।


