नगरी नगरी द्वारे द्वारे ढूंढूं रे सांवरिया
Nagari Nagari Dware Dware
श्री कृष्ण के वियोग में जीवात्मा की तड़प और नगर-नगर, द्वार-द्वार जाकर सांवरिया को खोजने का अत्यंत मार्मिक भजन।
🕉️ ॥ ध्रुवपद ॥
नगरी नगरी द्वारे द्वारे,
ढूंढूं रे सांवरिया।
पिया पिया रटते रटते,
बीत गई उमरिया॥
🌸 ॐ 🌸
🕉️ ॥ पद १ ॥
कोई कहे वो गोकुल में है,
कोई कहे बरसाने।
कोई कहे वो मथुरा में है,
कहाँ बसे मनमोहन?
नगरी नगरी द्वारे द्वारे...
🌸 ॐ 🌸
🕉️ ॥ पद २ ॥
नैनन में वो बसे हमारे,
मन मंदिर में सांवरिया।
प्रेम की डोरी से बंध आए,
मुरलीधर कन्हैया॥
नगरी नगरी द्वारे द्वारे...
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
सांवरिया को बाहर खोजने पर वह नहीं मिलता, परंतु जब भक्त अपने अंतर्मन में प्रेम से झांकता है, तो मनमोहन हृदय मंदिर में ही दर्शन देते हैं।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ इस भजन का तात्विक अर्थ क्या है?
ईश्वर बाहर तीर्थों या वनों में नहीं, बल्कि भक्त के निर्मल और प्रेमपूर्ण हृदय में वास करते हैं।


