बड़ी देर भई नंदलाला
Badi Der Bhayi Nandlala
बृजवासियों और गोपियों के बाल गोपाल के प्रति विरह और व्याकुलता को दर्शाने वाला यह भजन अत्यंत मार्मिक और भक्ति रस से परिपूर्ण है।
बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृजबाला।
बाल-ग्वाल सब राह निहारें, कब आओगे गोपाला॥
ग्वाल-बाल एक-एक से पूछें, कहाँ गए घनश्याम।
धूप-छांव में ढूंढत डोले, राधा और यशोदा मैया।
बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृजबाला॥
यमुना के तट सूने लागे, सूनी मधुबन की कुंज गलियां।
आके अपनी मुरली बजा दो, खिल जाएं मन की कलियां।
बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृजबाला॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
समस्त बृजवासी, ग्वाल-बाल, माता यशोदा और गोपियां कन्हैया की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनसे शीघ्र लौटकर अपनी बंशी की तान से सबको आनंदित करने की प्रार्थना कर रहे हैं।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ यह भजन किस भाव पर आधारित है?
यह वात्सल्य और माधुर्य भाव का अनुपम संगम है, जिसमें भगवान के वियोग में भक्तों की व्याकुलता वर्णित है।


