ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन
Aisi Lagi Lagan Meera Ho Gayi Magan
भक्त शिरोमणि मीरा बाई के अनन्य कृष्ण प्रेम और वैराग्य की अमर गाथा व्यक्त करने वाला यह कालजयी भजन भक्ति रस का सर्वोच्च शिखर है।
ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन,
वो तो गली-गली हरी गुण गाने लगी।
महलों में पली, बनके जोगन चली,
मीरा रानी दिवानी कहाने लगी॥
कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं,
मीरा गोविंद गोपाल गाने लगी।
बैठी संतों के संग, रंगी मोहन के रंग,
मीरा प्रेमी प्रीतम को रिझाने लगी।
ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन,
वो तो गली-गली हरी गुण गाने लगी॥
राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया,
मीरा सागर में सरिता समाने लगी।
दुःख लाखों सहे, मुख से गोविंद कहे,
मीरा गोविंद के रंग में रंगने लगी।
ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन,
वो तो गली-गली हरी गुण गाने लगी॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
मीरा बाई को भगवान श्री कृष्ण के प्रेम की ऐसी लगन लगी कि वे राजसी वैभव त्यागकर संतों के संग प्रभु के नाम संकीर्तन में मगन हो गईं। विष भी प्रभु कृपा से उनके लिए अमृत बन गया।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ ऐसी लागी लगन भजन किसने लिखा और गाया?
यह मीरा बाई के कृष्ण अनुराग पर आधारित पारंपरिक भजन है, जिसे अनूप जलोटा जी के गायन ने विश्वभर में अमर कर दिया।
❓ इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
सच्चे भक्त के लिए संसार के भौतिक सुख गौण होते हैं और ईश्वर के प्रति अनन्य समर्पण ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।


