भगवान सूर्य देव को दैनिक अर्घ्य एवं प्रातः पूजन विधि
Lord Surya Daily Arghya & Morning Pooja Vidhi
समस्त जगत के प्रत्यक्ष देवता भगवान भास्कर को प्रतिदिन प्रातः काल जल अर्पित करने से नेत्र ज्योति, आत्मविश्वास, दीर्घायु, समाज में मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
सूर्य को जल देने से गिरने वाली जलधारा प्रिज्म (Prism) की तरह कार्य करती है। जब प्रातःकालीन सूर्य की किरणें इस जलधारा से छनकर नेत्रों और हृदय पर पड़ती हैं, तो शरीर में विटामिन-डी, सकारात्मक ऊर्जा और जीवनी शक्ति का संचार होता है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ सूर्य देव को अर्घ्य का जल पैरों पर क्यों नहीं पड़ना चाहिए?
सूर्य देव को अर्पित किया गया जल पवित्र और पूज्य हो जाता है। अतः उसका पैरों पर पड़ना अनादर माना जाता है। इसलिए जल को किसी गमले, पौधे की क्यारी या तांबे की थाली में गिराना चाहिए।
❓ यदि आकाश में बादल हों और सूर्य न दिखें तो अर्घ्य कैसे दें?
यदि सूर्य देव बादलों के कारण दिखाई न दें, तब भी पूर्व दिशा की ओर मुख करके भावपूर्वक निर्धारित समय पर अर्घ्य देना पूर्ण फलदायी होता है।

