घर पर श्री सुंदरकांड पाठ करने की सम्पूर्ण विधि एवं नियम
Complete Sundarkand Paath & Pooja Vidhi (At Home)
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का पंचम सोपान 'सुंदरकांड' आत्मविश्वास, मनोबल और असंभव कार्यों को सिद्ध करने वाला अमोघ पाठ है।
🕉️ ॥ पाठ पूर्व तैयारी एवं वेदी सज्जा ॥
चौकी एवं राम दरबार स्थापना:
विधि: घर के शांत व स्वच्छ स्थान पर उत्तर या पूर्व मुखी चौकी लगाएं। लाल या पीला वस्त्र बिछाकर श्री राम दरबार का चित्र रखें। हनुमान जी के बैठने हेतु एक अलग छोटा लाल आसन या पाटा पास में रखें।
📿 मंत्र: ॐ आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥
🕉️ ॥ सुंदरकांड पाठ के पावन चरण ॥
१. हनुमान जी का पावन आह्वान:
विधि: भाव करें कि हनुमान जी महाराज आपके सम्मुख आसन पर विराजित होकर कथा का आनंद ले रहे हैं। उन्हें पुष्प और अक्षत अर्पित करें।
📿 मंत्र: अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
२. अखंड दीप एवं अगरबत्ती:
विधि: पाठ आरंभ करने से पूर्व गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें जो पूरे पाठ के दौरान जलता रहे।
📿 मंत्र: ॐ श्री हनुमते नमः, दीपं दर्शयामि।
३. पाठ का संकल्प एवं आरंभ:
विधि: हाथ में जल, अक्षत और सिक्का लेकर मनोकामना पूर्ति का संकल्प लें। फिर 'श्री गणेशाय नमः' बोलकर सुंदरकांड का पाठ प्रारंभ करें।
📿 मंत्र: शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्॥
४. दोहा एवं चौपाई गायन नियम:
विधि: पाठ करते समय बीच में किसी से बातचीत न करें। प्रत्येक दोहे के बाद सम्पुट (जैसे 'मंगल भवन अमंगल हारी') का गायन कर सकते हैं।
📿 मंत्र: राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥
५. पाठ समापन एवं हनुमान आरती:
विधि: साठ दोहे पूर्ण होने पर भगवान श्री राम की स्तुति (श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन) और हनुमान जी की आरती करें।
📿 मंत्र: आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
६. प्रसाद एवं क्षमा याचना:
विधि: बेसन के लड्डू, बूंदी अथवा हलवे का भोग लगाएं और सभी उपस्थित जनों में वितरित करें।
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
सुंदरकांड में हनुमान जी के समुद्र लांघने, लंका दहन और सीता जी की सुधि लाने की अद्भुत विजय गाथा है। इसका पाठ मनुष्य के अवसाद (डिप्रेशन), भय और हीनभावना को समाप्त कर आत्मबल को जागृत करता है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ सुंदरकांड का पाठ किस समय करना सर्वोत्तम होता है?
मंगलवार या शनिवार को संध्या के समय (सूर्यास्त के आसपास) समूह अथवा परिवार के साथ सुंदरकांड का सस्वर पाठ करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
❓ सुंदरकांड पाठ में हनुमान जी के लिए अलग आसन क्यों रखा जाता है?
धार्मिक मान्यता है कि जहां भी रामकथा या सुंदरकांड का पाठ होता है, वहां हनुमान जी सूक्ष्म रूप में स्वयं उपस्थित होते हैं, इसलिए उनके बैठने हेतु अलग आसन बिछाया जाता है।

