श्री महामृत्युंजय अनुष्ठान एवं रोग निवारण शिव पूजा विधि
Mahamrityunjaya Anushthan & Healing Shiva Pooja
ऋग्वेद का अमर महामंत्र "त्र्यम्बकं यजामहे" अकाल मृत्यु को टालने और गंभीर रोगों से मुक्ति दिलाने वाला महा-संजीवनी मंत्र है। इसका शास्त्रीय अनुष्ठान जीवन को नवजीवन प्रदान करता है।
🕉️ ॥ पूर्व तैयारी एवं सामग्री व्यवस्था ॥
आवश्यक पूजन सामग्री:
विधि: पारद या स्फटिक अथवा पार्थिव शिवलिंग, शुद्ध गाय का कच्चा दूध, गंगाजल, शहद, दुर्वा, बेलपत्र, सफेद आंकड़े के फूल, रुद्राक्ष की माला (१०८ मनके), सफेद चन्दन, भस्म, घी का दीपक।
📿 मंत्र: ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥
🕉️ ॥ चरण १: दीप प्रज्वलन एवं महामृत्युंजय संकल्प ॥
आरोग्य संकल्प:
विधि: प्रातः स्नानादि के बाद उत्तर दिशा में मुख करके बैठें। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर रोगी अथवा स्वयं के दीर्घायु व स्वास्थ्य की कामना से संकल्प करें।
📿 मंत्र: मम आत्मनः सकल रोग, शोक, अकालमृत्यु निवारणार्थं श्रीमहामृत्युंजय प्रीत्यर्थं जपं करिष्ये।
🕉️ ॥ चरण २: दुग्ध व गंगाजल की अनवरत धारा ॥
जलाभिषेक विधान:
विधि: शिवलिंग पर तांबे या चांदी के लोटे से गंगाजल और कच्चे दूध की पतली धारा चढ़ाते हुए निरंतर महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण करें।
📿 मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
🕉️ ॥ चरण ३: भस्म, चन्दन एवं बेलपत्र अर्पण ॥
त्रिपुण्ड्र एवं पत्र समर्पण:
विधि: महादेव को तीन उंगलियों से पवित्र भस्म का त्रिपुण्ड्र लगाएं। 11 या 21 चिकने बेलपत्र 'ॐ नमः शिवाय' बोलते हुए उलटे करके शिवलिंग पर अर्पित करें।
📿 मंत्र: त्रिशाखैस्त्रिगुणैर्दलैस्त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्। त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥
🕉️ ॥ चरण ४: रुद्राक्ष माला से १०८ या १००० जप ॥
संजीवनी जप साधना:
विधि: गौमुखी में रुद्राक्ष माला रखकर महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। जप करते समय रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का ध्यान करें।
📿 मंत्र: ॐ जूं सः पालय पालय सः जूं ॐ।
🕉️ ॥ चरण ५: आरती एवं अभिमंत्रित जल प्राशन ॥
आरोग्य जल ग्रहण:
विधि: भगवान शिव की आरती करें। शिवलिंग पर चढ़े हुए पवित्र जल और गंगाजल को तांबे के पात्र में एकत्र कर 'महाप्रसाद' के रूप में रोगी को पिलाएं और स्वयं भी आचमन करें।
📿 मंत्र: ॐ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
महामृत्युंजय मंत्र जीवनदायिनी शक्ति का अक्षय स्रोत है। भगवान शिव की कृपा से यह अकाल मृत्यु के भय को मिटाकर साधक को संसार के समस्त बंधनों से मुक्त कर अमृतत्व प्रदान करता है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ महामृत्युंजय मंत्र जप के लिए कौन सी माला सर्वोत्तम है?
महामृत्युंजय मंत्र के जप के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष की माला ही सर्वश्रेष्ठ और शास्त्र सम्मत मानी गई है।
❓ क्या घर पर महामृत्युंजय जप किया जा सकता है?
हाँ, घर के शांत और स्वच्छ कोने में शिवलिंग के समक्ष घी का दीपक जलाकर शुद्ध मन से नित्य 1 या 11 माला जप अत्यंत कल्याणकारी है।


