श्री हनुमान जी की सरल पूजन एवं सिन्दूर अर्पण विधि
Shri Hanuman Pooja & Sindoor Arpan Vidhi (At Home)
कलियुग के जागृत देव संकटमोचन श्री हनुमान जी की साधना समस्त भय, रोग, शनि दोष और प्रेत बाधा को दूर करने वाली है। मंगलवार और शनिवार को यह विधि अत्यंत फलदायी होती है।
🕉️ ॥ पूजा पूर्व तैयारी एवं नियम ॥
सात्विक शुद्धि एवं आसन:
विधि: लाल वस्त्र धारण कर पूर्व या उत्तर दिशा में लाल आसन पर बैठें। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी और श्री राम दरबार का चित्र स्थापित करें।
📿 मंत्र: ॐ मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
🕉️ ॥ हनुमान पूजन के पावन चरण ॥
१. श्री राम-सीता जी का स्मरण:
विधि: हनुमान जी की पूजा से पूर्व सदैव मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और माता सीता का ध्यान करें। बिना राम नाम के हनुमान जी पूजा स्वीकार नहीं करते।
📿 मंत्र: ॐ श्री रामचंद्राय नमः। ॐ जानकीवल्लभाय नमः॥
२. सिन्दूर एवं चमेली तेल (चोला अर्पण):
विधि: शुद्ध चमेली के तेल में नारंगी सिन्दूर घोलकर अनामिका उंगली से हनुमान जी की प्रतिमा पर लेपन करें।
📿 मंत्र: सिन्दूरं शोभनं रक्तं तेजसां दीप्तिकारकम्। हनुमत्प्रीतये दत्तं सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥
३. जनेऊ एवं लाल लंगोट समर्पण:
विधि: हनुमान जी को ब्रह्मचारी रूप में जनेऊ और लाल लंगोट या कलावा अर्पित करें।
📿 मंत्र: ॐ श्री हनुमते नमः, यज्ञोपवीतं वस्त्रं च समर्पयामि॥
४. लाल पुष्प एवं तुलसी दल:
विधि: लाल गुलाब, गेंदा या गुड़हल के पुष्प तथा तुलसी के पत्तों की माला भगवान के गले में पहनाएं।
📿 मंत्र: ॐ हनुमते नमः, तुलसीदलानि रक्तपुष्पाणि समर्पयामि॥
५. बूंदी, गुड़-चना एवं फल भोग:
विधि: ताजी बूंदी, बेसन के लड्डू अथवा भुने चने और गुड़ का भोग लगाएं। पान का बीड़ा (लौंग-इलायची युक्त) अर्पित करें।
📿 मंत्र: ॐ पवननन्दनाय नमः, मोदकं गुड़-चणकं नैवेद्यं निवेदयामि॥
६. चालीसा, बजरंग बाण एवं आरती:
विधि: शुद्ध उच्चारण के साथ श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ करें और अंत में आरती कीजै हनुमान लला की गाएं।
📿 मंत्र: आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
हनुमान जी सेवा और समर्पण के सर्वोच्च आदर्श हैं। जब माता सीता ने उन्हें सिन्दूर का महत्व बताया कि इससे श्री राम प्रसन्न होते हैं, तो उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिन्दूर लगा लिया था। सिन्दूर अर्पण अनन्य शरणागति का प्रतीक है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ क्या महिलाएं हनुमान जी को सिन्दूर लगा सकती हैं?
महिलाएं हनुमान जी की पूर्ण भक्ति और चालीसा पाठ कर सकती हैं, परंतु हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं, इसलिए महिलाओं को उन्हें स्पर्श करके सिन्दूर चढ़ाने से परहेज करना चाहिए।
❓ हनुमान जी को चमेली का तेल ही क्यों चढ़ाया जाता है?
चमेली का तेल शीतलता और सुगंध प्रदान करता है, जिससे सिन्दूर के साथ मिलकर यह हनुमान जी के तेज और ओज को शांत व प्रसन्न करता है।

