श्री गणेश चतुर्थी स्थापना एवं विसर्जन पूजा विधि (घर पर)
Ganesh Chaturthi Sthapana & Visarjan Pooja Vidhi
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी के जन्मोत्सव पर घर में पार्थिव गणेश जी की स्थापना व आराधना से समस्त अमंगलों का नाश होता है।
🕉️ ॥ स्थापना पूर्व वेदी एवं कलश सज्जा ॥
चौकी निर्माण एवं प्राण-प्रतिष्ठा तैयारी:
विधि: उत्तर या पूर्व दिशा में लकड़ी के पटरे पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। अक्षत की अष्टदल कमल बनाकर उस पर श्री गणेश जी की मिट्टी की नवीन प्रतिमा स्थापित करें।
📿 मंत्र: ॐ अस्य प्राणप्रतिष्ठापनं करिष्ये। ॐ मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्वरिष्टं यज्ञꣳ समिमं दधातु॥
🕉️ ॥ गणेश चतुर्थी पूजन के मुख्य चरण ॥
१. प्राण-प्रतिष्ठा (दिव्य चेतना का आह्वान):
विधि: हाथ में कुशा या पुष्प लेकर प्रतिमा का स्पर्श करें और भाव करें कि साक्षात भगवान गणेश इसमें विराजित हो रहे हैं।
📿 मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः सिद्धि-बुद्धि सहिताय श्री मन्महागणाधिपतये नमः, सुप्रतिष्ठितो भव॥
२. सिन्दूर एवं लाल चन्दन अर्पण:
विधि: भगवान गणेश जी के मस्तक और उदर पर लाल सिन्दूर का लेप लगाएं।
📿 मंत्र: सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥
३. दूर्वा के २१ अंकुर समर्पण:
विधि: दूर्वा (दूब घास) के २१ अंकुर जोड़े में (१० जोड़े + १) बनाकर भगवान गणेश जी के चरणों और मस्तक पर अर्पित करें।
📿 मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः, दूर्वाङ्कुरान् समर्पयामि॥
४. मोदक एवं लड्डू का भोग:
विधि: भगवान गणेश जी को २१ मोदक अथवा बेसन/बूंदी के लड्डुओं का भोग लगाएं।
📿 मंत्र: ॐ श्री गणपतये नमः, मोदकान् नैवेद्यं निवेदयामि॥
५. इक्कीस पावन नामों से अर्चा:
विधि: सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्ननाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन आदि नामों से पुष्प अर्पित करें।
📿 मंत्र: ॐ सुमुखाय नमः, ॐ एकदन्ताय नमः, ॐ लम्बोदराय नमः...॥
६. दैनिक सेवा एवं विसर्जन नियम:
विधि: स्थापित दिनों तक प्रतिदिन प्रातः व सायं आरती करें। विसर्जन के दिन उत्तर-पूजा कर, क्षमा मांगते हुए 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयघोष के साथ बहते जल में विसर्जन करें।
📿 मंत्र: यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्। इष्टकामप्रसिद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश जी को अतिथि रूप में घर में विराजित कर उनकी सेवा करना यह सिखाता है कि जो भक्त अपना अहंकार विसर्जित कर देता है, उसके जीवन में विघ्नहर्ता स्वयं ज्ञान और समृद्धि बनकर वास करते हैं।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों वर्जित है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार चतुर्थी के दिन चंद्रमा ने गणेश जी के स्वरूप का उपहास किया था, जिसके कारण इस दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक (झूठा आरोप) लगने का दोष माना जाता है।
❓ गणेश जी को दूर्वा इतनी प्रिय क्यों है?
अनलसूर दैत्य को निगलने के बाद जब गणेश जी के पेट में तीव्र जलन हुई थी, तब ऋषियों ने दूर्वा अर्पित कर उनकी जलन शांत की थी। तभी से दूर्वा गणेश जी को अत्यंत प्रिय है।

