Lord Vishnu (भगवान श्री हरि विष्णु)
🛕 Lord Vishnu (भगवान श्री हरि विष्णु)

श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम्

Shri Vishnu Sahasranama Stotram

महाभारत के अनुशासन पर्व में पितामह भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को उपदिष्ट भगवान श्रीहरि विष्णु के 1000 पावन नामों का यह महास्तोत्र समस्त पापों, भयों और ग्रहदोषों का समूल नाश करने वाला है।

🕉️ ॥ ध्यानम् ॥

शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।

प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं,

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।

लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं,

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

🌸 ॐ 🌸
🕉️ ॥ मुख्य स्तोत्रम् ॥

ॐ विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः।

भूतकृद् भूतभृद् भावो भूतात्मा भूतभावनः॥ १ ॥

🌸 ॐ 🌸

पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमा गतिः।

अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च॥ २ ॥

🌸 ॐ 🌸

योगो योगविदां नेता प्रधानपुरुषेश्वरः।

नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः॥ ३ ॥

🌸 ॐ 🌸

सर्वः शर्वः शिवः स्थाणुर्भूतादिर्निधिरव्ययः।

सम्भवो भावनो भर्ता प्रभवः प्रभुरीश्वरः॥ ४ ॥

🌸 ॐ 🌸

स्वयम्भूः शम्भुरादित्यः पुष्कराक्षो महास्वनः।

अनादिनिधनो धाता विधाता धातुरुत्तमः॥ ५ ॥

🌸 ॐ 🌸

अप्रमेयो हृषीकेशः पद्मनाभोऽमरप्रभुः।

विश्वकर्मा मनुस्त्वष्टा स्थविष्ठः स्थविरो ध्रुवः॥ ६ ॥

🌸 ॐ 🌸

अग्राह्यः शाश्वतः कृष्णो लोहिताक्षः प्रतर्दनः।

प्रभूतस्त्रिककुब्धाम पवित्रं मङ्गलं परम्॥ ७ ॥

🌸 ॐ 🌸

ईशानः प्राणदः प्राणो ज्येष्ठः श्रेष्ठः प्रजापतिः।

हिरण्यगर्भो भूगर्भो माधवो मधुसूदनः॥ ८ ॥

🌸 ॐ 🌸

ईश्वरो विक्रमी धन्वी मेधावी विक्रमः क्रमः।

अनुत्तमो दुराधर्षः कृतज्ञः कृतिरात्मवान्॥ ९ ॥

🌸 ॐ 🌸

सुरेशः शरणं शर्म विश्वरेताः प्रजाभवः।

अहः संवत्सरो व्यालः प्रत्ययः सर्वदर्शनः॥ १० ॥

🌸 ॐ 🌸
🕉️ ॥ फलश्रुतिः ॥

इतीदं कीर्तनीयस्य केशवस्य महात्मनः।

नाम्नां सहस्रं दिव्यानामशेषेण प्रकीर्तितम्॥

य इदं शृणुयान्नित्यं यश्चापि परिकीर्तयेत्।

नाशुभं प्राप्नुयात् किञ्चित् सोऽमुत्रेह च मानवः॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

जगत के आधार, चतुर्भुज, शांत स्वरूप भगवान श्रीहरि विष्णु के सहस्त्र (हजार) पावन नामों का पाठ समस्त अमंगलों और भयों का नाश करता है। पितामह भीष्म ने शरशैया पर लेटे हुए महाराज युधिष्ठिर को यह दिव्य ज्ञान दिया था कि जो मनुष्य नित्य इस स्तोत्र का पाठ करता है या सुनता है, उसे इस लोक और परलोक में कभी कोई अशुभ प्राप्त नहीं होता।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ विष्णु सहस्रनाम का पाठ कब करना चाहिए?

प्रातः काल स्नानादि के उपरांत अथवा एकादशी, गुरुवार और पूर्णिमा के दिन इसका पाठ करना अमोघ फलदायी होता है।

❓ यदि पूरा सहस्रनाम न पढ़ सकें तो क्या विकल्प है?

'श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥' इस एक श्लोक का पाठ पूरे विष्णु सहस्रनाम के तुल्य माना गया है।