श्री कुबेर अष्टलक्ष्मी महामंत्र
Shri Kuber Ashtalakshmi Maha Mantra
समस्त ब्रह्मांड के धनाध्यक्ष यक्षराज कुबेर और माँ अष्टलक्ष्मी की संयुक्त कृपा दिलाने वाला यह महामंत्र ऋण मुक्ति, धन-धान्य समृद्धि और अकूत वैभव प्रदाता है।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
ॐ यक्षराजाय विद्महे अलकाधीशाय धीमहि।
तन्नो कुबेरः प्रचोदयात्॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः॥
मनुजवाह्यविमानवरस्थितं गरुडरत्ननिभं निधिनायकम्।
शिवसखं मुकुटाङ्गदभूषणं सजलमेघरुचिं प्रमदायुतम्॥
धनाधिपं सव्यकरेण गदायुतं वरदहस्तयुतं मणिभूषणम्।
नमामि यक्षपतिं धनदं विभुं सकललोकहितप्रदमीश्वरम्॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
हे यक्षराज, विश्रवा ऋषि के पुत्र, धन-धान्य के अधिपति श्री कुबेर देव! मुझे धन, धान्य और समृद्धि प्रदान कीजिए। माँ अष्टलक्ष्मी और कुबेर देव मिलकर मेरे घर में समस्त अभावों को मिटाकर स्थाई सुख, ऐश्वर्य और धन की वर्षा करें।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ कुबेर मंत्र का जप किस माला से करना चाहिए?
कमलगट्टे की माला अथवा स्फटिक की माला से उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुबेर मंत्र का जप करना सर्वोत्तम है।
❓ कितनी संख्या में जप करना चाहिए?
नित्य 1 माला (108 बार) अथवा धनतेरस/दीपावली पर 11 माला का जप सिद्धिकारक माना गया है।


