Lord Ganesha (प्रथम पूज्य श्री गणेश)
🛕 Lord Ganesha (प्रथम पूज्य श्री गणेश)

श्री गणेश अथर्वशीर्षम् (Ganapati Atharvashirsha)

Shri Ganesh Atharvashirsha

अथर्ववेद का यह उपनिषद भगवान श्री गणेश के परब्रह्म स्वरूप का साक्षात निरूपण है। इसके पाठ से बुद्धि, विद्या, एकाग्रता और समस्त विघ्नों का समूल नाश होता है।

ॐ नमस्ते गणपतये।

त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि।

त्वमेव केवलं कर्ताऽसि।

त्वमेव केवलं धर्ताऽसि।

त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।

त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।

त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम्॥ १ ॥

🌸 ॐ 🌸

ऋतं वच्मि। सत्यं वच्मि॥ २ ॥

🌸 ॐ 🌸

अव त्वं माम्। अव वक्तारम्।

अव श्रोतारम्। अव दातारम्।

अव धातारम्। अवानूचानमव शिष्यम्।

अव पश्चात्तात्। अव पुरस्तात्।

अवोत्तरात्तात्। अव दक्षिणात्तात्।

अव चोर्ध्वात्तात्। अवाधरात्तात्।

सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात्॥ ३ ॥

🌸 ॐ 🌸

त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः।

त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः।

त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि।

त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।

त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि॥ ४ ॥

🌸 ॐ 🌸

सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते।

सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।

सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।

सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति।

त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः।

त्वं चत्वारि वाक्पदानि॥ ५ ॥

🌸 ॐ 🌸

त्वं गुणत्रयातीतः। त्वमवस्थात्रयातीतः।

त्वं देहत्रयातीतः। त्वं कालत्रयातीतः।

त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम्।

त्वं शक्तित्रयात्मकः।

त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम्।

त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्म भूर्भुवः स्वरोम्॥ ६ ॥

🌸 ॐ 🌸

गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनन्तरम्।

अनुस्वारः परतरः। अर्धेन्दुलसितम्।

तारेण ऋद्धम्। एतत्तव मनुस्वरूपम्।

गकारः पूर्वरूपम्। अकारो मध्यमरूपम्।

अनुस्वारश्चान्त्यरूपम्। बिन्दुरुत्तररूपम्।

नादः सन्धानम्। संहिता सन्धिः।

सैषा गणेशविद्या। गणक ऋषिः।

निचृद्गायत्रीच्छन्दः। गणपतिर्देवता।

ॐ गं गणपतये नमः॥ ७ ॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

हे श्री गणेश! आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष तत्त्व हैं, आप ही कर्ता, धर्ता और संहारक हैं। आप सच्चिदानन्द परब्रह्म हैं। आप मूलाधार चक्र में नित्य विराजमान हैं। दसों दिशाओं से आप मेरी रक्षा करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' आपका महामंत्र है। इसके पाठ से सभी प्रकार के अमंगलों का नाश और ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होती है।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ किस दिन करना चाहिए?

प्रत्येक बुधवार तथा संकष्टी व विनायक चतुर्थी के दिन दूर्वा चढ़ाकर अथर्वशीर्ष का पाठ करना परम फलदायी होता है।

❓ अथर्वशीर्ष का 21 बार पाठ करने का क्या महत्व है?

चतुर्थी के दिन 21 बार अथर्वशीर्ष का पाठ अथवा अभिषेक करने से समस्त कार्य सिद्ध होते हैं और बुद्धि अत्यंत तीक्ष्ण होती है।