श्री दशावतार स्तोत्रम्
Shri Dashavatara Stotram
गीतगोविन्दकार महाकवि जयदेव जी द्वारा विरचित भगवान श्रीहरि के दस दिव्य अवतारों की यह अमर स्तुति 'जय जगदीश हरे' के उद्घोष से चराचर जगत को पावन करती है।
॥ १. मत्स्य अवतार ॥
प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदम्।
विहितवहित्रचरित्रमखेदम्॥
केशव धृतमीनशरीर जय जगदीश हरे॥ १ ॥
क्षितिरिह विपुलतरे तिष्ठति तव पृष्ठे।
धरणिधरणकिणचक्रगरिष्ठे॥
केशव धृतकच्छपरूप जय जगदीश हरे॥ २ ॥
वसति दशनशिखरे धरणी तव लग्ना।
शशिनि कलङ्ककलेव निमग्ना॥
केशव धृतशूकररूप जय जगदीश हरे॥ ३ ॥
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृङ्गम्।
दलितहिरण्यकशिपुतनुभृङ्गम्॥
केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥ ४ ॥
छलयसि विक्रमणे बलिमद्भुतवामन।
पदनखनीरजनितजनपावन॥
केशव धृतवामनरूप जय जगदीश हरे॥ ५ ॥
क्षत्रियरुधिरमये जगदपगतपापम्।
स्नपयसि पयसि शमितभवतापम्॥
केशव धृतभृगुपतिरूप जय जगदीश हरे॥ ६ ॥
वितरसि दिक्षु रणे दिक्पतिकमनीयम्।
दशमुखमौलिबलिं रमणीयम्॥
केशव धृतरामशरीर जय जगदीश हरे॥ ७ ॥
वहसि वपुषि विशदे वसनं जलदाभम्।
हलहतिभीतिमिलितयमुनाभम्॥
केशव धृतहलधररूप जय जगदीश हरे॥ ८ ॥
निन्दसि यज्ञविधेरहह श्रुतिजातम्।
सदयहृदय दर्शितपशुघातम्॥
केशव धृतबुद्धशरीर जय जगदीश हरे॥ ९ ॥
म्लेच्छनिवहनिधने कलयसि करवालम्।
धूमकेतुमिव किमपि करालम्॥
केशव धृतकल्किशरीर जय जगदीश हरे॥ १० ॥
श्रीजयदेवकवेरिदमुदितमुदारम्।
शृणु सुखदं शुभदं भवसारम्॥
केशव धृतदशविधरूप जय जगदीश हरे॥ ११ ॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
महाकवि जयदेव द्वारा विरचित इस स्तोत्र में भगवान श्रीहरि के मत्स्य, कच्छप, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, बलराम, बुद्ध और कल्कि इन दस अवतारों की लीला का मनोहर गान किया गया है। हे दस रूपों को धारण करने वाले जगदीश केशव! आपकी सदा जय हो।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ दशावतार स्तोत्र के रचयिता कौन हैं?
यह स्तोत्र 12वीं शताब्दी के सुप्रसिद्ध संस्कृत महाकवि जयदेव जी द्वारा रचित अमर ग्रंथ 'गीतगोविन्दम्' का मंगलाचरण है।
❓ दशावतार स्तोत्र के पाठ का क्या लाभ है?
भगवान विष्णु के सभी अवतारों का एक साथ स्मरण करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि होती है तथा समस्त पाप नष्ट होते हैं।


