Maa Vaishno Devi (माँ वैष्णो देवी)
🛕 Maa Vaishno Devi (माँ वैष्णो देवी)

माँ वैष्णो देवी चालीसा

Maa Vaishno Devi Chalisa

जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित त्रिकूटा पर्वत की पवित्र गुफा में विराजित माँ वैष्णो देवी की यह चालीसा भक्तों को अखंड सौभाग्य, विजय और आत्मिक आनंद प्रदान करती है।

📜 ॥ दोहा ॥

गरुड़ वाहिनी वैष्णवी, त्रिकूटा पर्वत वास।

करहु कृपा जग जननि माँ, पूरण कीजै आस॥

भैरव गर्व प्रहारिणी, भक्तन सुख की खान।

चरण कमल में शीश धर, करूँ तुम्हारा ध्यान॥

🌸 ॐ 🌸
🪔 ॥ चौपाई ॥

जय जय वैष्णवी माता कल्याणी। त्रिभुवन पूजित अमर भवानी॥

कटरा नगर सुहावन लागे। दर्शन कर सब पाप जो भागे॥

🌸 ॐ 🌸

बाणगंगा में जो जल न्हावे। शीतल निर्मल काया पावे॥

चरण पादुका दर्शन कीन्हा। भक्ति भाव का पावन चीन्हा॥

🌸 ॐ 🌸

अर्द्धकुंवारी गुफा सुहानी। नौ माह तप कीन्हो भवानी॥

गर्भ जून से जो नर जावे। गर्भ वास का कष्ट न पावे॥

🌸 ॐ 🌸

हाथी मत्था चढ़त अपारा। सांझी छत पर लागे प्यारा॥

भवन तुम्हारा अति मनभावन। पिंडी रूप विराजत पावन॥

🌸 ॐ 🌸

महाकाली महालक्ष्मी रूपा। महासरस्वती ज्ञान स्वरूपा॥

तीन पिंडी में रूप समाया। सकल सृष्टि का सार लखाया॥

🌸 ॐ 🌸

भैरव नाथ को मुक्ति दीना। अपनी चरण शरण में लीना॥

कहा मातु जो भवन पधारे। भैरव दर्शन बिन फल न सारे॥

🌸 ॐ 🌸

ध्वजा नारियल भेंट चढ़ावे। हलवा पूरी भोग लगावे॥

जयकारे की गूंज सुहाई। प्रेम सहित जो चालीसा गाई॥

🌸 ॐ 🌸

पुत्र हीन को पुत्र दिलावे। कोढ़ी का तन कंचन बनावे॥

निर्धन को धन सम्पति भारी। संकट काटे मातु दुलारी॥

🌸 ॐ 🌸
📜 ॥ दोहा ॥

माँ वैष्णो के धाम जो, सच्चे मन से जाय।

कष्ट क्लेश सब दूर हों, परम आनंद समाय॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

त्रिकूटा पर्वत पर बाणगंगा, चरणपादुका, अर्द्धकुंवारी (गर्भजून) और पवित्र भवन की यात्रा कर माँ वैष्णो देवी के दर्शन करने से समस्त पाप और जन्म-मरण के कष्ट मिट जाते हैं। महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के एकाकार स्वरूप की यह चालीसा भक्तों को मनवांछित फल देती है।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ माँ वैष्णो देवी चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

नवरात्रि, शुक्रवार, या यात्रा से पूर्व व पश्चात नित्य प्रातः-सांध्य यह पाठ अत्यंत मंगलकारी है।

❓ भैरव दर्शन का क्या रहस्य है?

माँ वैष्णो देवी ने भैरवनाथ को वध के उपरांत मोक्ष प्रदान करते हुए वरदान दिया था कि जब तक भक्त तुम्हारे दर्शन नहीं करेंगे, तब तक यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाएगी।