Lord Surya (भगवान श्री सूर्य देव)
🛕 Lord Surya (भगवान श्री सूर्य देव)

श्री सूर्य चालीसा (Shri Surya Chalisa)

Shri Surya Chalisa

प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य की यह चालीसा नेत्र ज्योति, तेज, ओज, यश और शारीरिक आरोग्यता की वृद्धि करने वाली परम शक्तिशाली स्तुति है।

📜 ॥ दोहा ॥

कनक बदन कुण्डल मकर, मुकुट शीश पर भाल।

सप्त अश्वरथ साजि कै, चलत प्रभाकर ख्याल॥

🌸 ॐ 🌸

तिमिर नाशक दिनकर प्रभू, सकल जगत आधार।

सूर्य चालीसा पढ़त जो, पावै सुख अपार॥

🌸 ॐ 🌸
🪔 ॥ चौपाई ॥

जय जय जय रविदेव कृपाला, सकल जगत के करहु प्रतिपाला।

तेज पुंज तुम अमित प्रकाशा, सब जग में तुम करहु विलासा॥

🌸 ॐ 🌸

सप्त तुरंग रथ वाहन साजे, अरुण सारथी आगे विराजे।

द्वादश आदित्य रूप तुम धारे, ब्रह्मा विष्णु महेश निहारे॥

🌸 ॐ 🌸

ऋषि कश्यप के पुत्र कहाए, अदिति उदर जन्म प्रभु पाए।

वेद पुरान गावत गुण तेरा, कोटि भानु सम तेज घनेरा॥

🌸 ॐ 🌸

अंधकार सब दूर भगावै, सकल सृष्टि में जीवन लावै।

रोग शोक सब कष्ट मिटावै, जो जन प्रातः शीश नवावै॥

🌸 ॐ 🌸

ताम्र पात्र में जल भरि लावे, कुंकुम अक्षत लाल सुहावे।

अर्घ्य समर्पित कर जो ध्यावे, सो नर सब सुख वैभव पावे॥

🌸 ॐ 🌸

कुष्ठ रोग अरु नेत्र विकारा, सूर्य कृपा से पल में टारा।

राज समाज प्रतिष्ठा पावै, मनवांछित फल सहजहिं आवै॥

🌸 ॐ 🌸

जो यह सूर्य चालीसा गावे, सब संकट से मुक्ति पावे।

द्वादश मास पढ़ै चित लाई, सूर्य देव की कृपा सदाई॥

🌸 ॐ 🌸
📜 ॥ दोहा ॥

सकल मनोरथ सिद्ध हों, मिटैं सकल संताप।

सूर्य देव के ध्यान सों, नशहिं त्रिबिध अरु पाप॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

भगवान भुवनभास्कर सूर्य समस्त संसार की आत्मा हैं। जो साधक तांबे के लोटे में जल, लाल रोली और अक्षत लेकर सूर्य देव को अर्घ्य देकर सूर्य चालीसा का पाठ करता है, उसकी नेत्र ज्योति, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और मान-प्रतिष्ठा में अद्भुत वृद्धि होती है।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ सूर्य चालीसा का पाठ किस समय करना चाहिए?

सूर्य चालीसा का पाठ प्रातः काल सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके करना सर्वोत्तम होता है।

❓ सूर्य देव को अर्घ्य देने का क्या नियम है?

तांबे के पात्र में शुद्ध जल, लाल पुष्प, कुमकुम और थोड़ा अक्षत डालकर दोनों हाथों को सिर से ऊपर उठाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।