श्री साईं चालीसा
Shri Sai Chalisa
शिर्डी के परम दयालु सद्गुरु साईं नाथ की यह पावन चालीसा भक्तों के समस्त कष्टों का निवारण कर जीवन में श्रद्धा, सबुरी, शांति और समृद्धि का संचार करती है।
अनुपम छवि श्री साईं की, शांत स्वरूप सुजान।
शिरडी में आसन लियो, पूरण कीन्हो काम॥
धूलि चरण की शीश धर, वंदन बारंबार।
साईं कृपा कटाक्ष से, होवे बेड़ा पार॥
जय जय साईं नाथ कृपाला। दुःख भंजन जन के प्रतिपाला॥
शिरडी नगर में वास तुम्हारा। भक्त जनों का काज संवारा॥
कफनी झोली सोहे तन पर। ज्ञान विभूति झलके आनन पर॥
जाति पांति का भेद मिटाया। सबका मालिक एक बताया॥
जो नर शरण तिहारी आवे। मनवांछित सोई फल पावे॥
दीन दुखी के संकट टारे। पल में विपदा दूर निवारे॥
द्वारकामाई आसन लागा। सोया भाग्य भक्त का जागा॥
धूनी अखंड जलाई भारी। भस्म जाकी सब रोग निवारी॥
जल से दीपक तुमने जलाए। देख अचम्भा सब नर ध्याए॥
नीम के पत्ते मीठे कीन्हे। अद्भुत रूप जगत को दीन्हे॥
श्यामा तात्या काका नाना। सबने तुमको ईश्वर माना॥
अब्दुल और म्हाळसापति प्यारे। चरण शरण रह काज सुधारे॥
जब जब विपदा भक्तन आई। दौड़े दौड़े पहुँचे साईं॥
सच्चा प्रेम हृदय में लावे। साईं कृपा सहज ही पावे॥
अंधे को प्रभु नयन दिया है। कोढ़ी का तन कंचन कीन्हा॥
बांझन को सुत संपति दीन्हा। दीन अनाथ का संशय छीना॥
ग्यारह वचन जो मन में धारे। भवसागर से साईं तारे॥
सदा सहायक साईं हमारे। भक्त जनों के कष्ट विदारे॥
गुरुवार को जो चालीसा गावे। पुत्र पौत्र सुख सम्पति पावे॥
प्रेम सहित जो ध्यान लगावे। साईं लोक में आदर पावे॥
सद्गुरु साईं नाथ जी, दया करो महाराज।
शरण पड़ा हूँ आपकी, राखो मेरी लाज॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
शिर्डी के कृपानिधान सद्गुरु साईं नाथ की पावन चालीसा भक्तों के समस्त संकटों को हरने वाली है। जिन्होंने पानी से दीये जलाए, कड़वे नीम को मीठा किया, और अखंड धूनी प्रज्वलित कर उसकी भस्म से असाध्य रोगों को दूर किया। 'सबका मालिक एक' का उपदेश देने वाले साईं बाबा के चरणों में जो निष्कपट भाव से समर्पित होता है, उसके सारे कष्ट मिट जाते हैं।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ साईं चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
गुरुवार के दिन 1, 3 या 11 बार साईं चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ और शीघ्र फलदायी माना जाता है।
❓ साईं चालीसा पाठ के नियम क्या हैं?
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, साईं बाबा की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं, पीले पुष्प व हलवे का भोग अर्पित करें और श्रद्धा-सबुरी का संकल्प लें।


