श्री राम चालीसा (Shri Ram Chalisa)
Shri Ram Chalisa
अयोध्यापति भगवान श्री राम की यह पावन चालीसा जीवन में मर्यादा, धर्म, मानसिक शांति और विजय का संचार करती है।
श्री रघुवीर भक्त हितकारी, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई, ता सम धन्य और नहिं होई॥
ध्यान धरे जो राम नाम का, सकल मनोरथ सिद्ध होय ताका।
करहु कृपा प्रभु दीन दयाला, हरहु सकल भव विपत कराला॥
जय रघुपति पद वन्दन कीन्हा, परमानन्द सकल जन दीन्हा।
कौशल्या नन्दन सुखदाता, दशरथ नृप कुल कीर्ति विधाता॥
ताड़का मारी मुनि सुख दीन्हा, जनक धनुष पल माहिं तोरीन्हा।
सीता संग ब्याह भयो भारी, आनन्दित भए अवध विहारी॥
पितु आज्ञा वनवास सिधारे, भरत भ्रात को नैनन तारे।
दण्डक वन पावन प्रभु कीन्हा, शबरी बेर प्रेम सों लीन्हा॥
सुग्रीवहिं मिलि मित्र बनाई, बालि मारि प्रभु कीर्ति बढ़ाई।
वानर सेना संग सिधारे, सिन्धु सेतु बाँधत अनुहारे॥
रावण कुम्भकरण संहारे, सुर नर मुनि के काज सँवारे।
विभीषण को लंकापति कीन्हा, सीता सहित अवध पग दीन्हा॥
राज सिंहासन बैठे रामा, जय जयकार करे सब धामा।
राम राज्य सम सुख नहिं भाई, जहं दुख दारिद कहुं न समाई॥
जो नर राम चालीसा गावै, सो नर भव से पार परावै।
रोग दोष सब व्याधि नसावै, अंत काल रघुवर पुर जावै॥
राम नाम सुमिरन करहु, धरहु हृदय में ध्यान।
सकल काज सिद्ध करहिं, प्रभु श्री राम सुजान॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने धर्म की स्थापना और अधर्म के नाश हेतु अवतार लिया। जो भक्त नित्य श्री राम चालीसा का स्मरण करते हैं, उनके जीवन में मर्यादा, शांति और समस्त सिद्धियों का प्राकट्य होता है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ श्री राम चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
प्रतिदिन प्रातः काल स्नान के उपरांत अथवा राम नवमी और मंगलवार/रविवार के दिन राम चालीसा का पाठ विशेष फलदायी होता है।
❓ राम चालीसा के क्या फल हैं?
इसके पाठ से पारिवारिक कलह समाप्त होते हैं, धर्म और सदाचार की प्रेरणा मिलती है तथा आंतरिक शांति का अनुभव होता है।


