Mata Lakshmi (माँ महालक्ष्मी)
🛕 Mata Lakshmi (माँ महालक्ष्मी)

श्री लक्ष्मी चालीसा (सम्पूर्ण)

Shree Lakshmi Chalisa (Complete)

धन, ऐश्वर्य, वैभव और आरोग्यता की स्वामिनी माँ महालक्ष्मी की 40 पावन चौपाइयों का स्तोत्र, जिसके पाठ से दारिद्र्य का नाश होता है।

॥ दोहा ॥ मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस॥ ॥ सोरठा ॥ यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं। सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदम्बिका॥ ॥ चौपाई ॥ सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान, बुद्धि, विद्या दो मोही॥ तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥ जय जय जगत जननि जगदम्बा। सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥ तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥ जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥ विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥ केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥ कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥ ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥ क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥ चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥ जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥ स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥ तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥ अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥ तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥ मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वाञ्छित फल पाई॥ त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥ जो चालीसा पढ़ें पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥ ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥ ॥ दोहा ॥ लक्ष्मी चालीसा पढ़े, जो कोई चित्त लगाय। ऋद्धि-सिद्धि सुख-संपति, लहै परम पद पाय॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

समुद्रसुता माँ लक्ष्मी सभी जीवों का पोषण करने वाली और दरिद्रता दूर करने वाली हैं। जो भक्त शुद्ध हृदय से लक्ष्मी चालीसा का पाठ करता है, उसके घर में स्थायी लक्ष्मी और शांति का वास होता है।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ लक्ष्मी चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

प्रतिदिन संध्या काल में घी का दीपक प्रज्वलित कर तथा शुक्रवार एवं दीपावली के दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ विशेष फलदायी है।