श्री खाटू श्याम चालीसा
Shri Khatu Shyam Chalisa
हारे के सहारे, शीश के दानी लखदातार भगवान श्री खाटू श्याम जी की यह पावन चालीसा जीवन के हर मोड़ पर अटूट संबल और असंभव को संभव करने वाली कृपा प्रदान करती है।
श्री गुरु पद नख मणि चंद्रिका, प्रकाशे उर ज्ञान।
वर्णन करूँ श्याम यश, दीजै कृपा निधान॥
हारे के तुम हो सहारे, तीन बाण के धारी।
खाटू में आसन लियो, जय जय श्याम मुरारी॥
जय जय श्री श्याम देवा, कलयुग के अवतारी।
भक्त जनों के काज संवारे, महिमा अति भारी॥
बर्बरीक अहिलावती के नंदन, भीमसेन के पौत्र प्रनंदन।
महाबली अति पराक्रमी तुम, देव दनुज सब करत वंदन॥
तीन बाण तरकस में साजे, लखदातार नाम जग गाजे।
महाभारत के युद्ध रचाए, धर्म पक्ष हित शीश चढ़ाए॥
श्रीकृष्ण जब शीश माँगा, एक पलक नहिं संशय लागा।
हंसकर शीश दान प्रभु कीन्हा, कृष्ण रूप वर पावन लीन्हा॥
कहा कृष्ण तुम कलयुग माही, श्याम नाम से पूजे जाही।
जो आवेगा खाटू द्वारे, संकट सब पल में संहारे॥
फाल्गुन शुक्ल ग्यारस मेला, उमड़त भक्तन का शुभ रेला।
निशान ध्वजा ले भक्त जो आवे, मनवांछित सोई फल पावे॥
श्याम कुंड में जो नर नहावे, निर्मल काया सो नर पावे।
इत्र गुलाब की सुगंध सुहाई, चरणामृत की महिमा गाई॥
हारे का सहारा कहलाओ, डूबत नैया पार लगाओ।
निर्धन को धनवान बनावे, बांझन को संतान दिवावे॥
रोग शोक सब दूर हटावे, जो नर प्रेम से चालीसा गावे।
सच्चे मन से जो कोई ध्यावे, श्याम कृपा निश्चय ही पावे॥
खाटू वाले श्याम प्रभु, रखियो मेरी लाज।
दीन दुखी की विनती सुन, सिद्ध करो सब काज॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
महाबली बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण के माँगने पर धर्म की रक्षा हेतु सहर्ष अपना शीश दान कर दिया था। भगवान कृष्ण ने उन्हें अपना ही नाम 'श्याम' प्रदान कर वरदान दिया कि कलयुग में तुम हारे के सहारे और लखदातार के रूप में पूजे जाओगे। खाटू नरेश की चालीसा गाने वाले पर कभी निराशा नहीं ठहरती।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ खाटू श्याम चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
प्रतिदिन प्रातः या सांध्य आरती के समय तथा विशेष रूप से एकादशी (ग्यारस) और शनिवार को इसका पाठ करना अत्यंत फलदायी है।
❓ श्याम बाबा को 'हारे का सहारा' क्यों कहा जाता है?
क्योंकि जो व्यक्ति संसार में हर ओर से निराश और पराजित हो जाता है, खाटू श्याम जी की शरण में आते ही उसका कल्याण हो जाता है।


