Maa Kali (माँ महाकाली)
🛕 Maa Kali (माँ महाकाली)

श्री काली चालीसा (Shri Kali Chalisa)

Shri Kali Chalisa

आदिशक्ति माँ महाकाली की यह चालीसा अकाल मृत्यु, तंत्र बाधा, घोर शत्रु पीड़ा और मानसिक भय को जड़ से समाप्त करने वाली अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है।

📜 ॥ दोहा ॥

मातु कृपा करि दीजिये, विमल ज्ञान विस्तार।

काली चालीसा कहौं, मेटहु भव जंजाल॥

🌸 ॐ 🌸

खड्ग खप्पर धरि हाथ में, मुण्डमाल गल साजि।

दुष्ट दलन शुभ रूप माँ, हृदय विराजहु आजि॥

🌸 ॐ 🌸
🪔 ॥ चौपाई ॥

जय जय जय काली महारानी, त्रिभुवन विख्यात कल्याणी।

चण्ड मुण्ड दैत्यन दल मारे, शुम्भ निशुम्भ क्षण माहिं संहारे॥

🌸 ॐ 🌸

रक्तबीज जब भूमि सम्हारा, खप्पर भरि रुधिर सब धारा।

देव सबहिं भयमुक्त करायो, इन्द्र आदि पद फेर दिलायो॥

🌸 ॐ 🌸

श्यामा रूप परम विकराला, लहलहाती जीभ रसाला।

चारु भुजा खड्ग त्रिशूल सोहे, देखत रूप सकल जग मोहे॥

🌸 ॐ 🌸

काल रूप शिव उर पग धायो, लज्जित होय जिह्वा दिखलायो।

भक्तन पर तू मात दयाली, सदा सहाय करति माँ काली॥

🌸 ॐ 🌸

जो नर काली चालीसा गावे, भूत पिशाच निकट नहिं आवे।

शत्रु बाधा सब मिट जावे, सुख सम्पति यश आनन्द पावे॥

🌸 ॐ 🌸
📜 ॥ दोहा ॥

काली मात कृपानिधि, दूर करो मम क्लेश।

सदा बसो मम हृदय में, हरहु सकल कलेश॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

माँ महाकाली बुराई और अंधकार का नाश करने वाली पराशक्ति हैं। उनका विकराल रूप केवल आसुरी शक्तियों के लिए है, जबकि अपने निष्कपट भक्तों के लिए वे परम वात्सल्यमयी माँ हैं। चालीसा के पाठ से सभी भय और नकारात्मकता मिट जाती है।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ काली चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

रात्रि काल में, विशेषकर मंगलवार, शनिवार या अमावस्या के दिन काली चालीसा का पाठ परम लाभकारी होता है।

❓ क्या गृहस्थ लोग काली चालीसा का पाठ कर सकते हैं?

हाँ, गृहस्थ जन सात्विक भाव से माँ को माता मानकर रक्षा और कल्याण हेतु श्रद्धापूर्वक पाठ कर सकते हैं।