श्री गायत्री चालीसा (Shri Gayatri Chalisa)
Shri Gayatri Chalisa
समस्त वेदों की जननी माँ गायत्री की यह चालीसा सद्बुद्धि, आत्मतेज, पाप नाश और आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करने का अमोघ साधन है।
ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड।
शान्ति क्रान्ति मन्दाकिनी, गायत्री जग वन्द॥
जगत जननी मङ्गल करनि, गायत्री सुखधाम।
प्रणवों सावित्री सहित, शम्भु रमापति नाम॥
जय जय गायत्री माता, वेदमयी जग विख्याता।
आदि शक्ति तुम ब्रह्म प्रकाशा, सकल भुवन में तुम्हरि विलासा॥
हंस वाहिनी श्वेत वसना, ज्ञान सुधा रस पूरण रसना।
अक्षर चौबीस परम पुनीता, वेद पुरानन माहिं विधीता॥
ऋषि मुनि सुर नर ध्यावत तोही, ज्ञान विवेक प्रदान करो ही।
जो जन गायत्री नित गावै, सो नर भव बन्धन तर जावै॥
गायत्री चालीसा पढ़ै, जो कोई चित्त लगाय।
सद्बुद्धि पावै सुख बढ़ै, पातक दूर पराय॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
माँ गायत्री वेदों की जननी और साक्षात ब्रह्मविद्या हैं। उनके 24 अक्षर समस्त ब्रह्मांड के ज्ञान का सार हैं। गायत्री चालीसा के पाठ से अंतःकरण शुद्ध होता है और बुद्धि सद्मार्ग पर अग्रसर होती है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ गायत्री चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
गायत्री चालीसा का पाठ त्रिकाल संध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में गायत्री महामंत्र के साथ करना सर्वश्रेष्ठ है।
❓ गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों का क्या महत्व है?
गायत्री महामंत्र के 24 अक्षर 24 दिव्य शक्तियों और सिद्धियों के बीज हैं, जो मनुष्य के समग्र व्यक्तित्व का उत्थान करते हैं।


