श्री भैरव चालीसा (Shri Bhairav Chalisa)
Shri Bhairav Chalisa
काशी के कोतवाल और भगवान शिव के रौद्र अवतार भगवान काल भैरव की यह चालीसा भय, नजर दोष, ग्रह पीड़ा और नकारात्मक ऊर्जा का तुरंत नाश करती है।
श्री गणपति गुरु गौरि पद, प्रेम सहित सिर नाय।
करौं चालीसा भैरवहिं, कृपा करहु मन लाय॥
जय जय श्री भैरव दयाल, संकट हरहु हमार।
काशी कोतवाल प्रभू, कीजै बेड़ा पार॥
जय जय भैरव रूप कराला, गले विराजत मुण्डन माला।
श्वान सवारी अति मन भावे, देखत भूत पिशाच डेरावे॥
डमरू त्रिशूल हाथ में सोहे, रूप अनूप सकल जग मोहे।
काशी धाम विराजत देवा, सुर नर मुनि सब करते सेवा॥
जो नर भैरव चालीसा गावे, संकट व्याधि निकट नहिं आवे।
शनि अरु राहु दोष टरि जावे, भैरव कृपा अमर फल पावे॥
भैरव चालीसा पढ़ै, जो नर प्रेम बढ़ाय।
भय भागे सुख उपजै, दुसह दरिद्र नशाय॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
भगवान काल भैरव काशी के कोतवाल और शिव जी के अवतार हैं। वे काल के भी काल हैं और अपने भक्तों के संकटों का त्वरित निवारण करते हैं। भैरव चालीसा के पाठ से अकाल मृत्यु, प्रेत बाधा और शत्रु भय समाप्त हो जाता है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ भैरव चालीसा का पाठ किस दिन करना चाहिए?
रविवार और मंगलवार के दिन संध्या समय काल भैरव की चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
❓ भैरव बाबा को क्या भोग लगाया जाता है?
उड़द की दाल के पकोड़े, इमरती, नारियल और सरसो के तेल का दीपक काल भैरव को अर्पित किया जाता है।

