श्री बगलामुखी चालीसा
Shri Baglamukhi Chalisa
दशमहाविद्याओं में आठवीं प्रमुख महाविद्या माँ बगलामुखी की यह चालीसा शत्रुओं के कुचक्र, षड्यंत्र, अनचाहे विवादों और विपत्तियों को निष्फल कर सर्वत्र विजय दिलाती है।
नमो महाविद्या बगलामुखी, सुख सम्पति दात्री।
शत्रु नाशिनी दुःख भंजिनी, जय जय पीत वस्त्री॥
स्वर्ण वरण त्रिनयन युता, गदा हस्त में साजे।
जिह्वा खींच असुर मथे, भुवन तेज विराजे॥
जय जय जय पीताम्बरा माई। कोटि सूर्य सम तेज सहाई॥
दतिया धाम विराजत पावन। सिद्ध पीठ अतिशय मनभावन॥
हल्दी रंग वसन परिधाना। पीत पुष्प माला अनुमाना॥
शत्रु सैन्य को स्तम्भन कीन्हा। धर्म ध्वजा फहराय सुदीन्हा॥
वादी प्रतिवादी जो होई। शरण तिहारी आवे कोई॥
मुख की वाणी मूक कराई। सत्य न्याय की कीर्ति बढ़ाई॥
राज काज में जय दिलवावे। कोर्ट कचहरी संकट मिटावे॥
मारण मोहन उच्चाटन टारे। भक्त जनों के कष्ट विदारे॥
जो नर नित्य पढ़े चालीसा। तापर कृपा करें जगदीशा॥
पीत आसन पर ध्यान लगावे। मनवांछित फल निश्चय पावे॥
बगलामुखी की कृपा से, मिटे सकल संताप।
शत्रु शांत सब होयहीं, रहे न कोई पाप॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
शत्रुओं की बुद्धि और जिह्वा को स्तम्भित करने वाली माँ पीताम्बरा बगलामुखी की चालीसा समस्त नकारात्मक शक्तियों, ईर्ष्या, षड्यंत्र और झूठे मुकदमों से रक्षा करती है। माँ की साधना में पीला रंग, हल्दी और पीले पुष्पों का प्रयोग किया जाता है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ बगलामुखी चालीसा के पाठ के क्या नियम हैं?
पीले वस्त्र पहनकर, पीले आसन पर बैठकर, हल्दी की माला या रुद्राक्ष से माँ का ध्यान करते हुए पाठ करना चाहिए।
❓ माँ बगलामुखी का मुख्य सिद्धपीठ कहाँ है?
मध्य प्रदेश के दतिया में माँ पीताम्बरा पीठ विश्वविख्यात सिद्धपीठ है।

