श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी (महामंत्र संकीर्तन)
Shri Krishna Govind Hare Murari
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी समस्त संकटों को हरने वाला और आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला दिव्य महामंत्र संकीर्तन है।
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥ (ध्रु.)
पितु मात सहायक स्वामी सखा,
तुम ही एक नाथ हमारे हो।
जिनके कछु और आधार नहीं,
तिनके प्रभु तुम रखवारे हो॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
प्रहलाद विभीषण पाले तुही,
गजराज के संकट टाले तुही।
द्रौपदी की लाज बचाई तुही,
असुरासुर संहारे तुही॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
करुणा निधि दीन दयाल प्रभु,
दुखिया जन के रखवारे हो।
हम दीन अनाथ शरण पड़े,
प्रभु आप हमारे सहारे हो॥
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
हे श्री कृष्ण! हे गोविंद! हे मुरारी! हे नाथ! हे नारायण! हे वासुदेव! आप ही हमारे माता, पिता, स्वामी और परम सखा हैं। इस संसार में जिनका कोई अन्य सहारा नहीं, आप ही उनके परम रक्षक हैं।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ इस भजन संकीर्तन का क्या महत्व है?
श्रीमद्भागवत एवं वैष्णव परंपरा में यह संकीर्तन कलियुग के समस्त पापों और भयों से मुक्ति दिलाने वाला महामंत्र माना गया है।

