माँ वैष्णो देवी की आरती
Maa Vaishno Devi Ki Aarti
त्रिकूट पर्वत की पवित्र गुफा में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती पिंडी स्वरूप में विराजित माँ वैष्णो देवी की यह अलौकिक आरती मनोकामना पूर्ण करने वाली है।
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।
द्वार तुम्हारे जो आवे, सो सुख-सम्पति पाता॥ जय वैष्णवी माता...
गरुड़ वाहिनी माता, कंचन थाल विराजे।
शीश छत्र अति सुन्दर, घंटा ध्वनि बाजे॥ जय वैष्णवी माता...
तीन पिंडी रूप विराजत, त्रिकूटा पर्वत ध्याऊँ।
महाकाली महालक्ष्मी सरस्वती, गुण निशिदिन गाऊँ॥ जय वैष्णवी माता...
भैरव को वर दीना, कृपा करी अपारा।
जो भक्तन की विपदा, पल में दियो संहारा॥ जय वैष्णवी माता...
पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट चढ़त सुखकारी।
जो जन ध्यान लगावत, जय जय जय त्रिपुरारी॥ जय वैष्णवी माता...
आरती मात तुम्हारी, जो जन मन चित लावे।
कहत भक्त जन सारे, मनवांछित फल पावे॥
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।
द्वार तुम्हारे जो आवे, सो सुख-सम्पति पाता॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
त्रिकूटा पर्वत पर साक्षात् निवास करने वाली आदिशक्ति माँ वैष्णवी के चरणों में शत-शत वंदन। माँ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों रूपों में भक्तों का कल्याण करती हैं। माँ के दरबार में जो भी श्रद्धा से शीश नवाता है, उसके समस्त संकट मिट जाते हैं।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ माँ वैष्णो देवी की आरती के मुख्य लाभ क्या हैं?
माँ वैष्णो देवी की नित्य आरती से घर में सुख-शांति, समृद्धि, भय से मुक्ति और आरोग्य का वरदान मिलता है।
❓ माँ वैष्णो देवी को क्या भेंट प्रिय है?
लाल चुनरी, नारियल, मेवे, फल, हलवा-चना और लाल पुष्प माता रानी को अति प्रिय हैं।


