जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी (शनि देव आरती)
Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan Hitkari
कर्मफलदाता भगवान शनि देव की यह स्तुति साढ़ेसाती, ढैय्या एवं जीवन की समस्त अड़चनों को शांत कर न्याय, संयम और समृद्धि प्रदान करती है।
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी...
श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी...
क्रीट मुकुट शीश सहज दिपत है लीलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी...
मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी...
देव दनुज ऋषि मुनि सब दिशा विचारी।
सब पर प्रभु कृपा दृष्टि करहु त्रिपुरारी॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी...
आरती जो कोई नर प्रेम सहित गावै।
शनि दोष मिटे सब सुख सम्पति पावै॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी...
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
सूर्यपुत्र और छाया के लाडले भगवान शनि देव भक्तों के परम कल्याणकारी हैं। आपके नीले वस्त्र, गज की सवारी और चतुर्भुज रूप न्याय और धर्म की रक्षा करते हैं। जो भक्त आपकी शरण में आते हैं, उनके समस्त कष्ट और ग्रह दोष दूर हो जाते हैं।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ शनि देव की आरती कब करनी चाहिए?
शनिवार की संध्या के समय पीपल वृक्ष के नीचे अथवा शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित कर यह आरती करनी चाहिए।
❓ शनि देव को क्या वस्तुएं अर्पित करना शुभ है?
काले तिल, सरसों का तेल, नीले पुष्प, उड़द की दाल और लोहे की वस्तुएं शनि देव को अत्यंत प्रिय हैं।


