Maa Santoshi (संतोषी माता)
🛕 Maa Santoshi (संतोषी माता)

जय सन्तोषी माता (संतोषी माँ आरती)

Jai Santoshi Mata (Santoshi Mata Aarti)

मन में संतोष, धैर्य और गृह क्लेशों का निवारण करने वाली माँ संतोषी की यह आरती शुक्रवार व्रत के उद्यापन और पूजन में अनिवार्य रूप से गाई जाती है।

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता।

अपने सेवक जन की, सुख संपति दाता॥ ॐ जय सन्तोषी माता...

🌸 ॐ 🌸

सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो।

हीरा पन्ना दमके, मुकुट शीश दीन्हो॥ ॐ जय सन्तोषी माता...

🌸 ॐ 🌸

घृत पूरण दो दीपक, मधुमेवा भोग धरौ।

गुड़ और चना परम प्रिय, तामे संतोष करौ॥ ॐ जय सन्तोषी माता...

🌸 ॐ 🌸

सुवर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरे प्यारे।

धूप दीप नैवेद्य, आरती सब न्यारे॥ ॐ जय सन्तोषी माता...

🌸 ॐ 🌸

दुख दरिद्रता त्यागो, सुख सम्पति आवे।

सन्तोषी माँ की आरती, जो कोई नर गावे॥ ॐ जय सन्तोषी माता...

🌸 ॐ 🌸

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता।

अपने सेवक जन की, सुख संपति दाता॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

माँ संतोषी अपने भक्तों को परम संतोष और शांति का वरदान देती हैं। गुड़ और चने के साधारण भोग से भी मैया प्रसन्न होकर भक्तों की झोलियां खुशियों से भर देती हैं और समस्त पारिवारिक क्लेश मिटा देती हैं।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ संतोषी माता के व्रत में क्या सावधानी रखनी चाहिए?

संतोषी माता के शुक्रवार व्रत में किसी भी प्रकार की खट्टी वस्तु (नींबू, इमली, दही आदि) का स्पर्श या सेवन पूर्णतः वर्जित होता है।

❓ संतोषी माता को क्या भोग लगाया जाता है?

माँ संतोषी को भुने हुए चने और गुड़ का भोग अत्यंत प्रिय है।