भगवान परशुराम जी की आरती
Bhagwan Parashurama Aarti
सनातन धर्म के रक्षक, शस्त्र और शास्त्र दोनों के अद्वितीय ज्ञाता तथा चिरंजीवी भगवान परशुराम जी की यह आरती शौर्य, तेज और आत्मबल प्रदान करती है।
ॐ जय परशुराम देवा, प्रभु जय परशुराम देवा।
शस्त्र शास्त्र के ज्ञाता, तुम सुर मुनि सेवा॥ ॐ जय परशुराम देवा...
जमदग्नि के नंदन, रेणुका सुखकारी।
अक्षय तृतीया प्रकटे, महिमा अति भारी॥ ॐ जय परशुराम देवा...
फरसा हाथ विराजे, धनुष बाण साजे।
तेज पुंज मुख मंडल, देख दुष्ट भागे॥ ॐ जय परशुराम देवा...
सहस्रबाहु अभिमानी, पल माहिं संहारे।
अधर्म का नाश कियो, भू-भार उतारे॥ ॐ जय परशुराम देवा...
सप्त चिरंजीवन में, शोभित ऋषि राई।
ज्ञान भक्ति वैराग्य, तुम ही से पाई॥ ॐ जय परशुराम देवा...
जो नर आरती गावे, बल बुद्धि पावे।
धर्म का मार्ग गहे, संकट नहिं आवे॥
ॐ जय परशुराम देवा, प्रभु जय परशुराम देवा।
शस्त्र शास्त्र के ज्ञाता, तुम सुर मुनि सेवा॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के सुपुत्र भगवान परशुराम जी श्रीहरि के छठे अवतार हैं। जिन्होंने अधर्मियों और अत्याचारियों का दमन कर धर्म की पुनः स्थापना की। भगवान परशुराम की आरती करने से साधक को निर्भयता, ज्ञान और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ भगवान परशुराम जी का प्राकट्य कब हुआ था?
भगवान परशुराम जी का प्राकट्य वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (अक्षय तृतीया) को हुआ था।
❓ भगवान परशुराम जी को चिरंजीवी क्यों माना जाता है?
सनातन परंपरा के अनुसार भगवान परशुराम सप्त चिरंजीवियों में से एक हैं, जो आज भी महेंद्र पर्वत पर तपस्यारत हैं और कलयुग के अंत में कल्कि अवतार के गुरु बनेंगे।

