Lord Narasimha (भगवान श्री नरसिंह देव)
🛕 Lord Narasimha (भगवान श्री नरसिंह देव)

भगवान नरसिंह जी की आरती

Bhagwan Narasimha Aarti

खंभ फाड़कर प्रकट होने वाले और भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने वाले श्रीहरि विष्णु के नृसिंह अवतार की यह आरती समस्त भय, शत्रु और बाधाओं का नाश करती है।

ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।

स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥ ॐ जय नरसिंह हरे...

🌸 ॐ 🌸

तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी।

अद्भुत रूप बनाया, महिमा अति भारी॥ ॐ जय नरसिंह हरे...

🌸 ॐ 🌸

नर और सिंह विराजत, नख अति तीक्षण धारे।

हिरण्यकशिपु अभिमानी, पल में संहारे॥ ॐ जय नरसिंह हरे...

🌸 ॐ 🌸

प्रह्लादहि उर लायो, अभयदान दीना।

देव मुनि गंधर्वन, जय जयकार कीना॥ ॐ जय नरसिंह हरे...

🌸 ॐ 🌸

जो नर ध्यान लगावे, कष्ट निवारत हो।

भूत पिशाच निकट नहिं आवे, रक्षा धारत हो॥ ॐ जय नरसिंह हरे...

🌸 ॐ 🌸

करुणासिंधु दयानिधि, शरण तिहारी आय।

दीनबंधु कृपा कर, भव बंधन कट जाय॥ ॐ जय नरसिंह हरे...

🌸 ॐ 🌸

ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।

स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

भगवान श्रीहरि ने अपने अनन्य भक्त प्रह्लाद की सत्यनिष्ठा की रक्षा हेतु पाषाण स्तंभ को चीरकर नृसिंह रूप धारण किया और महाअसुर हिरण्यकशिपु का वध किया। भगवान नरसिंह की आरती करने से अज्ञात भय, तांत्रिक बाधाएं और कोर्ट-कचहरी के कष्ट नष्ट होते हैं।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ नरसिंह भगवान की आरती का पाठ कब करना चाहिए?

नरसिंह जयंती, प्रदोष काल अथवा मंगलवार/शनिवार की संध्या को इस आरती का पाठ करना विशेष फलदायी होता है।

❓ भगवान नरसिंह किस प्रकार के कष्ट दूर करते हैं?

शत्रु भय, नकारात्मक ऊर्जा, ग्रह दोष और किसी भी प्रकार के अन्याय से रक्षा के लिए भगवान नरसिंह की शरण ली जाती है।