Lord Kubera (धनाधिपति श्री कुबेर देव)
🛕 Lord Kubera (धनाधिपति श्री कुबेर देव)

श्री कुबेर देव की आरती

Shri Kuber Dev Ki Aarti

देवताओं के कोषाध्यक्ष एवं धन-संपत्ति के संरक्षक यक्षराज कुबेर की यह आरती दरिद्रता को मिटाकर जीवन में स्थाई सुख, वैभव और समृद्धि का वरदान देती है।

जय जय यक्षराज कुबेरा, धनपति देव कृपा निधान॥

शिव के प्रिय सखा कहलाओ, जग में वैभव सुख बरसाओ॥ जय जय यक्षराज...

🌸 ॐ 🌸

मुकुट मनोहर शीश विराजे, स्वर्ण कांति तन अतिशय साजे।

गदा हस्त नवनिधि के स्वामी, त्रिभुवन पूजित अंतरयामी॥ जय जय यक्षराज...

🌸 ॐ 🌸

अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता, लक्ष्मी संग तिहारो नाता।

धनतेरस जो आरती गावे, ताके घर सुख सम्पति आवे॥ जय जय यक्षराज...

🌸 ॐ 🌸

व्यापार में वृद्धि कराओ, कर्जों के जंजाल मिटाओ।

दीन दुखी पर कृपा दृष्टि धर, भर दो भंडार हे यक्षेश्वर॥ जय जय यक्षराज...

🌸 ॐ 🌸

धूप दीप नैवेद्य संजोऊँ, श्रद्धा भाव से शीश नवाऊँ।

कहत भक्त कर जोड़ प्रणामा, पूर्ण करो सब मन के कामा॥

जय जय यक्षराज कुबेरा, धनपति देव कृपा निधान॥

🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:

भगवान महादेव के परम प्रिय सखा और समस्त ब्रह्मांड के धनाध्यक्ष यक्षराज कुबेर की जय हो। आप अष्टसिद्धियों और नवनिधियों के स्वामी हैं। आपकी कृपा से दरिद्रता, आर्थिक संकट और ऋण का निवारण होता है तथा घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

❓ कुबेर देव की आरती कब करनी चाहिए?

प्रतिदिन संध्या समय अथवा विशेष रूप से धनतेरस, दीपावली और गुरुवार के दिन कुबेर आरती करना अत्यधिक शुभ फलदायी है।

❓ कुबेर जी की दिशा कौन सी है?

वास्तुशास्त्र के अनुसार उत्तर दिशा (North) कुबेर देव की दिशा है, जहाँ तिजोरी या पूजा स्थल रखना समृद्धिकारक होता है।