मंगल की सेवा सुन मेरी देवा (माँ काली आरती)
Mangal Ki Sewa Sun Meri Deva (Kali Aarti)
दुष्टों का संहार कर भक्तों की रक्षा करने वाली आदि शक्ति माँ महाकाली की यह आरती भय, शत्रु बाधा और तंत्र दोषों को क्षण भर में नष्ट करती है।
मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा।
हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल,
ले भेंट तेरे द्वार खड़े॥
मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा...
सुनो जगदम्बा, न कर विलम्बा।
सन्तन के काज सँवारे॥
धन-सम्पति सुख-सम्पति दाता,
भक्तों के संकट टारे॥
मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा...
खड्ग खप्पर त्रिशूल विराजे,
गले मुण्डन की माला॥
रक्तबीज शुम्भ निशुम्भ विदारण,
भक्तन प्रतिपाला॥
मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा...
कानन कुण्डल शोभित नीके,
गल मोतियन की माला॥
जो जन ध्यान धरे मन निसिदिन,
होय परम उजियाला॥
मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा...
कहत भक्तजन सुन जगदम्बा,
मैया लाज तिहारी॥
शरण पड़े की लाज राखिये,
माँ काली महतारी॥
मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा...
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
हे माँ जगदम्बिके, महाकाली! हम दोनों हाथ जोड़कर आपके पावन चरणों में मंगल सेवा के लिए उपस्थित हैं। आप दुष्टों और असुरों का संहार करने वाली तथा अपने साधकों और भक्तों की रक्षा करने वाली परम दयामयी माँ हैं।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ माँ काली की आरती करने का सबसे उत्तम दिन कौन सा है?
माँ काली की आरती शुक्रवार, शनिवार तथा अमावस्या और नवरात्रि की निशा में विशेष फलदायी मानी जाती है।
❓ काली आरती से कौन से भय समाप्त होते हैं?
इस आरती के नियमित पाठ से अकाल मृत्यु का भय, नजर दोष, शत्रु बाधा और अज्ञात मानसिक चिंताएं समाप्त हो जाती हैं।


