श्री गोवर्धन महाराज की आरती
Shri Govardhan Maharaj Ki Aarti
ब्रजभूमि के साक्षात् स्वरूप गिरिराज श्री गोवर्धन महाराज की यह आरती भक्तों को गौ-धन, अन्न-धन और प्रभु श्रीकृष्ण की अगाध कृपा प्रदान करती है।
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो, तोपे सोहे री बांके मुकुट।
श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो॥
तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े, तोपे चढ़े दूध की धार।
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो...
तेरी सात कोस की परिक्रमा, चकलेश्वर है विश्राम।
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो...
राधा कुंड और श्याम कुंड दोउ, मानसी गंगा स्नान।
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो...
जो नर परिक्रमा करत हैं, ताके पूरे सब काम।
तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो...
कहत सखा सब मिल गावत हैं, जय जय गिरिराज भगवान।
श्री गोवर्धन महाराज, तेरे माथे मुकुट विराज रह्यो॥
🌸 पावन भावार्थ एवं आध्यात्मिक महत्व:
हे गिरिराज गोवर्धन! आपके मस्तक पर दिव्य मुकुट सुशोभित है। भक्तगण आपको दूध की धार, पुष्प और तांबूल अर्पित करते हैं। आपकी सात कोस (लगभग 21 किलोमीटर) की पवित्र परिक्रमा करने से समस्त मनोरथ सिद्ध होते हैं और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।
💡 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ गोवर्धन आरती मुख्य रूप से कब की जाती है?
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा (अन्नकूट पर्व) पर और गिरिराज जी की परिक्रमा के समय यह आरती विशेष रूप से गाई जाती है।
❓ गोवर्धन पूजा का क्या संदेश है?
प्रकृति, गौवंश और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना तथा अहंकार को त्यागकर प्रभु की शरण में आना इसका मूल संदेश है।


